अरूणाचल प्रदेश
परिचय
अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर सिरे का एक जादुई, रहस्यमय और मनमोहक स्थान है जो भारत के सबसे अधिक लोकप्रिय अवकाश गंतव्यों में से एक है। यह व्यापक रूप से फैला हुआ पुरातात्विक महत्व का राज्य है जो समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भरपूर है। अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के सिरे पर स्थित है जो यहां की मनोरम पहाडियों तथा घाटियों में आपको सदैव आमंत्रित करता है। यहां आए और यहां के आनंददायी मौसम का अनुभव करें और यहां के सरल और आतिथ्य धर्म निभाने वाले निवासियों से मिले। यहां की कला और हस्तशिल्प की भव्य विरासत और रंग बिरंगे त्यौहार प्रकृति की अपार शक्ति में उनके प्राचीन विश्वास को दर्शाते हैं।
अरुणाचल प्रदेश अत्यंत समृद्ध स्तनधानी वन्य जीवन का आवास है जहां अनेक अक्षांश और मौसमी परिस्थितियों से अलग अलग प्रकार के वन बनते हैं जो वन्य जीवन की विभिन्न किस्मों को प्राकृतिक आवास और भोजन प्रदान करते हैं। यहां दो राष्ट्रीय पार्क और चार वन्य जीवन अभयारण्य है। यहां पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है : तवांग, दीरांग, बमडिला, टीपी, ईटानगर, मलीनिथान, लिकाबाली,पासीघाट, एलोंग, तेजू, मिआओ, रोइंग, दापोरिजो नामदाफा, भीष्मकनगर, पशुराम कुंड और खोंसा।
पर्यटन आकर्षण
- ऑर्किड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- त्यौहार (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- गंतव्य (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- सरकारी अनुमोदन प्राप्त स्थानीय टूर ऑपरेटर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- आवास (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- प्रवेश की औपचारिकताएं (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
पर्वतीय स्थल
तवांग
भारत - भूटान की सीमा पर लगभग 11,155 फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग मोनपा जनजाति का सबसे सुंदर स्थान है और यह अरुणाचल प्रदेश का सबसे अधिक लोकप्रिय पर्वतीय स्थान है। तवांग जिले में जिला मुख्यालय भी है और यह 400 वर्ष पुराने बौद्ध मठ के लिए प्रसिद्ध है (तवांग मठ) यह भारत का सबसे बड़ा मठ है। यहां की यात्रा कठिन है, जो एकदम पतली सड़क की खड़ी ऊंचाई वाली है। तवांग में दर्शकों को हिमालय पर्वत की बर्फ से ढकी चोटियां, गहरी घाटियां, पानी के झरने, सुंदर दृश्य और अनेक झीलें देखने को मिलती हैं।
ईटानगर
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वोत्तर में स्थित यह राज्य का पर्वतीय स्थल है। ईटानगर प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर और अतुलीय है। अरुणाचल प्रदेश का पूरा राज्य हाल ही में 1998 के दौरान पर्यटकों के लिए खोला गया है। सुरक्षा के अलावा यह इस क्षेत्र के जनजातीय समुदायों की पुरानी शताब्दियों से चली आ रही विरासत को संरक्षित करने का एक प्रयास था। राज्य की राजधानी, ईटानगर का अद्भुत सौंदर्य पर्यटकों को को दूर से खींच लाता है।
एलॉन्ग
एलॉन्ग समुद्री स्तर से 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित एलॉन्ग सुंदर गांवों वाला अरुणाचल प्रदेश का एक छोटा कस्बा है। एलॉन्ग गर्मी के मौसम के लिए अरुणाचल प्रदेश का सबसे अधिक आदर्श स्थान है। सुंदर पेड़ पौधों से भरा यह स्थान अरुणाचल प्रदेश के सर्वाधिक उपयुक्त स्वास्थ्य वर्धक स्थानों में से एक है। यहां जाने के लिए मीठुन और जर्सी क्रॉस ब्रीडिंग फार्म से गुजरना होता है जो एलॉन्ग से 25 किलोमीटर की दूरी पर कामाकी में स्थित है।
पासीघाट
अरुणाचल प्रदेश में पासीघाट 1911 के दौरान स्थापित किया गया सबसे पुराना कस्बा है। अरुणाचल प्रदेश में पासीघाट को आम तौर पर अरुणाचल प्रदेश राज्य का पर्यटन द्वार कहा जाता है। पासीघाट से ऐसे अनेक मनोरंजक स्थान है जिन्हें अरुणाचल प्रदेश में देखा जा सकता है। पासीघाट का नाम इस क्षेत्र की एक जनजाति पासी के नाम पर दिया गया है। यहां की मनोरम पहाडियां और हरी भरी नदी घाटियां अनेक जनजातियों का आश्रय हैं और यहां पर्यटकों तथा फोटोग्राफरों के लिए अद्भुत दृश्य उपलब्ध हैं।
जाइरो / जीरो
जाइरो अरुणाचल प्रदेश में 5754 फीट (1,780 मीटर) की ऊंचाई पर समुद्री तल से ऊपर स्थित है। यह ऊंचाई पर स्थित कस्बा पाइन के पेड़ों से भरी पहाडियों द्वारा सभी ओर से घिरा है। जाइरो को अपाटानी जनजाति का घर कहा जाता है। जाइरो बांस तथा पाइन के जंगलों, गांवों के साथ हस्तशिल्प का एक केन्द्र और टेरिन मछली का फार्म है जो काफी ऊंचाई पर स्थित है। यहां चावल को उगाने की एक स्वदेशी विधि भी देखने योग्य है।
खोंसा
हिमालय से घिरा खोंसा नामक स्थान 3,000 फीट की ऊंचाई पर तिराप जिले के जिला मुख्यालय में है। खोंसा की सीमा पूर्व में म्यांमार और दक्षिण में असम से जुड़ती है। यह सैन्य क्षेत्र है और यहां कोई हाइ (उग्रवादियों) द्वारा बनाया गया एक छोटा आउटपोस्ट भी देखा जा सकता है। खोंसा में ऑर्किड की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। एक डाली से दूसरी डाली तक कूदते गिब्बन बंदर, मस्क डीयर, लाल पांडा और मीथुन यहां की विशेषताएं हैं।
वन्य जीवन अभयारण्य
नामदाफा नेशनल पार्क
नामदाफा टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय पार्क है। यहां वास्तविक जंगल और हरियाली भरी वनस्पति की सुंदरता को देखा जा सकता है, यहां अभेद्य और हरित तथा अछूते जंगल 1985.23 वर्ग किलो मीटर के हिस्से में विविध जंतुओं और वनस्पति के साथ फैले हुए हैं और इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा भारत तथा बर्मा के बीच है जिसके अंदर चांग लांग जिला पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य का जिला है। नामदाफा नेशनल पार्क नोआ - दिहिंग नदी के साथ नीली पहाडियों के बीच मियाओ से कुछ दूर स्थित है। यह वर्षा वनों से आच्छादित है। इसे सरकार द्वारा 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
पक्षी प्रजातियों में यहां सबसे अधिक उल्लेखनीय सफेद पंखों वाली वुड डक है जो एक दुर्लब और खतरे में पड़ी प्रजाति है। ग्रेट इंडियन हार्न बिल, जंगली बाज़ और फीसेंट फ्लॉप इस जंगल में शोर मचाते उड़ते रहते हैं और जो अन्य रंग बिरंगी चिडियों तथा जंतुओं का शिकार करते हैं। यहां के नम उष्ण कटिबंधी वर्षा वन अनेक प्रकार के जंतुओं और चिडियों का आश्रय स्थल हैं, जिन्हें देखना एक अनोख अनुभव है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा उद्यान है जहां बाघ की चार प्रजातियां एक साथ पाई जाती हैं - पेंथेरा टाइग्रिस, पेंथेरा पार्डस, पेंथेरा अनसिया, नियोफेलिस नेबूलोसा। यहां अन्य अनेक प्रकार की बिल्लियां पाई जाती हैं। पार्क में प्राइमेट प्रजातियों की संख्या भी अधिक है। इसके उदाहरण हैं असमी मकाका, पिगटेल मकाका, स्टम्प टेल मकाका और अनेक विशिष्ट प्रकार के हूलोक गिब्बन (हाइलोबेट्स हुलोक), अत्यंत खतरे में पड़े और एकमात्र एप प्रजाति के जीव भी इस अभेद्य अछूते जंगल में घूमते पाए जाते हैं।
नामदाफा नेशनल पार्क पर और अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषय वस्तु प्रबंधन दल, 01-07-2009 को समीक्षित
