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विदेश में अध्‍ययन

विदेशों में प्रतिष्ठित विश्‍वविद्यालयों में अध्‍ययन करना असंख्‍य भारतीय विद्यार्थियों का स्‍वप्न है। वर्तमान परिदृश्‍य में जब विश्‍व को वैश्विक ग्राम (ग्‍लोबल विलेज) कहा जाता है यह स्‍वप्‍न पूरा कर पाना बहुत कठिन नहीं है।

कुछ अत्‍याधिक लोलुप पाठ्यक्रम जिन्‍हें छात्र विदेशों में पढ़ना चाहते हैं, वे है, मास्‍टर इन बिजनेस एडमिनिस्‍ट्रेशन (व्‍यावसायिक प्रशासन में स्‍नातकोत्तर) इंजीनियरिंग में डिग्री पाठ्यक्रम जैव प्रौद्योगिकी में डिग्री पाठ्यक्रम, मानवीय विज्ञानों आदि में स्‍नात्तक और स्‍नातकोत्तर। कुछ विदेशी देश सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत कुछ पात्र उम्‍मीदवारों को, जो उन देशों में अध्‍ययन करना चाहते हैं, छात्रवृत्ति देते हैं। ये छात्रवृत्तियां शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के माध्‍यम से भारत में आती है।

शिक्षा विभाग केवल उन्‍हीं छात्रवृत्तियों/अध्‍येतावृत्ति प्रवृत करता है जिन्‍हें विदेशी देशों द्वारा सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों और अन्‍य कार्यक्रमों के तहत प्रदान किया जाता है। विषय क्षेत्र साधारणत: सुविधा के आधार के आधार पर चुने जाते है जो आदाता द्वारा उनके विषय क्षेत्र के लिए उपलब्‍ध कराई जाती हैं और इसके लिए राष्‍ट्रीय आवश्‍यकताओं पर भी मद्देनजर रखा जाता है।

छात्रवृत्ति/अध्‍येतावृत्ति आदाता देश से प्राप्‍त करने पर इसका विज्ञापन रोजगार समाचार/अन्‍य अग्रणी समाचार पत्रों में और परिपत्र के जरिए राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों विश्‍वविद्यालयों आदि में छात्रवृत्ति की राशि, आयु सीमा, शैक्षिक योग्‍यता, अनुभव आदि का ब्‍यौरा देते हुए दिया जाता है। विज्ञापन में आवेदन का प्रारूप भी प्रकाशित किया जाता है।

तथापि, संबंधित भारतीय मिशन या दूतावास से विदेश में अध्‍ययन करने के संबंध में और अधिक जानने के लिए निम्‍नलिखित सम्‍पर्क पर क्लिक कर सकते हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल