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'माता-पिता और वरिष्‍ठ नागरिकों का भरण-पोषण विधेयक, 2007' में क्‍या प्रावधान किए गए हैं ?

उत्‍तर: ‘माता-पिता और वरिष्‍ठ नागरिकों का भरण-पोषण विधेयक-2007’ (-1 MB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है।) सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की एक पहल है।. यह 20 मार्च, 2007 को लोक सभा (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) में पेश किया गया था। विधेयक में यह कहा गया है कि वयस्‍क बच्‍चों और आगे उनके बच्‍चों से, जो परिवार के अर्जक सदस्‍य है, अपेक्षा की जाती है कि वे अपने माता-पिता और दादा-दादी का भरण-पोषण और संभाल करें। भरण-पोषण से तात्‍पर्य उचित आहार, कपड़ा, घर और चिकित्‍सा से है।

माता-पिता में पैदा करने वाले, गोद लेने वाले और सौतेले मां-बाप शामिल हैं। किसी वरिष्‍ठ नागरिक का ऐसा रिश्‍तेदार जिसके पास उस वरिष्‍ठ नागरिक की संपत्ति है अथवा उत्‍तराधिकार में उसे प्राप्‍त करेगा, भरण-पोषण की व्‍यवस्‍था करने के लिए जिम्‍मेदार है। प्रस्‍तावित विधेयक की महत्‍वपूर्ण विशेषता यह है कि यह न केवल 60 वर्ष से अधिक आयु वाले माता-पिता को संरक्षण प्रदान करेगा, बल्कि हर ऐसे माता-पिता को संरक्षण प्रदान करेगा जिन्‍हें इसकी जरुरत है।

विधेयक में प्रत्‍येक जिले में अदालतों को स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव किया गया है जहां दु:खी माता-पिता अपने उपेक्षित होने की शिकायत कर सकते हैं। वे सभी वयस्‍क, जो अपनी आमदनी अथवा अपने स्‍वामित्‍वाधीन संपत्ति से अपना अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हैं, आवेदन करने के पात्र होंगे। भरण-पोषण के लिए कितनी राशि दी जाए इस संबंध में अदालत द्वारा जारी किया जाएगा। बच्‍चों, पोती-पोतों अथवा रिश्‍तेदारों को ऐसा न करने पर जेल की सजा हो सकती है, दण्‍ड का भुगतान करना पड़ सकता है अथवा उन्‍हें वसीयत की गई संपत्ति के उत्‍तराधिकार से वंचित किया जा सकता है।

वरिष्‍ठ नागरिक के लिए निर्धारित किए गए लाभों को वह किस आयु में प्राप्‍त कर सकता है?

उत्‍तर: वरिष्‍ठ नागरिकों को छूट एवं लाभ प्रदान करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों ने अलग-अलग आयु निर्धारित की है:

वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए राष्‍ट्रीय नीति (-1 MB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है।) में 60 वर्ष और उससे अधिक की आयु वाले व्‍यक्ति को वरिष्‍ठ नागरिक माना गया है। इस कारण वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए राष्‍ट्रीय परिषद (वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए राष्‍ट्रीय परिषद) का सृजन किया गया है।. परिषद यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि वरिष्‍ठ नागरिक को मिलने वाली सुविधाएं और लाभ प्राप्‍त करने के लिए आयु सीमा समान रूप से 60 वर्ष और उससे अधिक करने पर विचार किया जाए। सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय ने सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्‍य सरकारों को निदेश दिया है कि वरिष्‍ठ नागरिक की स्‍तर पदवी प्रदान करने के लिए एक समान रूप से 60 वर्ष की आयु सीमा लागू की जाए।

मैं अकेले रहता/रहती हूं। मैं अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करुं?

उत्‍तर: चूंकि बच्‍चे अलग-अलग शहरों में जाकर बस जाते हैं इसलिए वरिष्‍ठ नागरिक अकेले रह जाते हैं। अकेलेपन और खराब स्‍वास्‍थ्‍य के कारण वे कई तरह के हादसों का शिकार बन जाते हैं। आप स्‍वयं को किस तरह इन हादसों से बचा सकते हैं इस बारे में यहां कुछ युक्तियां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) दी गई हैं:

  • सही फॉर्म (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) भरकर अपने घरेलू नौकरों और ड्राइवरों के नाम नज़दीकी थाने में दर्ज कराएं। फिर इस फार्म और उनकी फोटों को उन कर्मचारियों के मूल निवास स्‍थानों के थानों में भेजा जाएगा ताकि उनके चरित्र और घर-बाहर की तत्‍काल जांच की जा सके।
  • सुरक्षात्‍मक सुविधाओं जैसे कि निरीक्षण छिद्र, सुरक्षा सिटकनी (लैच) अथवा लोहे की ग्रिल की व्‍यवस्‍था करें ताकि किसी आगंतुक को अंदर लाने से पहले आप उसकी जांच कर सकें। किसी अपरिचित व्‍यक्ति जैसे कि सब्‍जी बेचने वाले, धोबी और दूध बेच वाले को अंदर लाते समय ज्‍यादा चौकन्‍ने रहें।
  • घरेलू नौकर के सामने अलमारी न खोलें, अपना कीमती सामान उन्‍हें मत दिखाएं अथवा पैसे के मामले में कोई बात न करें। इससे उन्‍हें अपराध करने के लिए बढ़ावा मिलता है।
  • घर में काम करने वाले नौकर चाकरों की तनख्‍वाह न रोकें, उनका अपमान न करें या उनके साथ दुर्व्‍यवहार न करें। वे बदला ले सकते हैं।
  • अधिक से अधिक मित्र बनाएं और अपने पड़ोसियों से बातचीत करें ताकि यह न लगे कि आप अकेला जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं। लोगों के साथ मिलकर सैर के लिए जाएं और सामाजिक बनें।
  • कीमती सामान घर पर न रखें। गहनों को बैंक के लॉकर में रखें और नकदी अपने बैंक खाते में। यदि संभव हो तो कुत्‍ता रख लें।
  • जरुरी टेलीफोन नंबर पास रखें। ये नंबर आस-पास रहने वाले दोस्‍तों अथवा रिश्‍तेदारों के हो और आपके इलाके के थाने के।
  • दिल्‍ली पुलिस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) ने वरिष्‍ठ नागरिकों के निवास स्‍थानों का लेखा-जोखा रखने के लिए गश्‍ती और प्रभागीय कांस्‍टेबलों का नियुक्‍त किया गया है। यदि आपको कोई समस्‍या है तो उन्‍हें सूचित करें। अपनी स्‍थानीय पुलिस से संपर्क बनाए रखें। आपात स्थिति में 100 अथवा 1291 नंबर पर फोन करें।

सदैव सतर्क रहें और आंख बंद करके किसी पर विश्‍वास न करें। इन उपायों से आपकी सुरक्षा की गारंटी होगी और किसी अप्रिय कोई अप्रिय घटना होने पर आपका बचाव हो सकेगा।

वरिष्‍ठ नागरिक विपरीत बंधक ऋण क्‍या है?

उत्तर : वरिष्‍ठ नागरिकों की बचत का एक बड़ा हिस्‍सा गैर - तरलित परिसंपत्तियों जैसे कि घर और संपत्ति में लगा होता है। वरिष्‍ठ नागरिकों के पास आम तौर पर कोई नियमित आय नहीं होती है और यदि वे अपनी पूरी बचत को समाप्‍त कर लेते हैं तब अपना घर बेचने के अलावा उनके पास अपना जीवन बिताने के व्‍यय पूरा करना कठिन होता है। एक विपरीत बंधक से वरिष्‍ठ नागरिक घर को गिरवी रख कर अपने आय का एक नियमित साधन प्राप्‍त कर सकते हैं, जिनके पास एक घर है। वरिष्‍ठ नागरिक घर के स्‍वामी बने रहते हैं और ऋण की पुन: अदायगी या इसकी किस्‍त चुकाए बिना अपने जीवन भर इसमें रह सकते हैं।

विपरीत बंधक कंपनी द्वारा भुगतान की गई मासिक राशि का उपयोग चिकित्‍सा व्‍यय, बिजली पानी आदि के बिल तथा अन्‍य व्‍ययों में किया जा सकता है। इसमें उधार लेने वाले व्‍यक्ति को घर में रहने की अवधि तक ऋण का पुन: भुगतान करने की आवश्‍यकता नहीं होती है। वे अपने घर के मूल्‍य से अधिक राशि नहीं ले सकते हैं। वरिष्‍ठ नागरिक की मृत्‍यु के बाद उधार देने वाली संस्‍था बंधक के साथ ब्‍याज की राशि को प्राप्‍त करने के लिए घर को बेच देती है। अतिरिक्‍त सभी राशि उधार लेने वाले व्‍यक्ति के उत्तराधिकारियों को दे दी जाती है। एक विपरीत बंधक और नियमित बंधक में मूल भूत अंतर यह हैकि विपरीत बंधक के अंतर्गत पहले से निर्धारित अवधि नहीं होती और इसे करने वाले व्‍यक्ति को मासिक किश्‍तों में भुगतान नहीं करना होता है। इसलिए यह वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए अत्‍यंत उपयोगी विधि है।

वरिष्‍ठ नागरिक को अपनी संपत्ति के मूल्‍य के अनुसार, उनकी आयु और प्रचलित ब्‍याज दर के आधार पर निर्धारित राशि प्रतिमाह मिलती है। आम तौर पर जिन लोगों के पास अधिक कीमती घर होता है और उनकी उम्र अधिक होती है, उन्‍हें प्रतिमाह अधिक राशि मिलती है। नेशनल हाउसिंग बैंक (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), जो घर के निधिकरण का विनियमन करता है, ने उन प्रचालनरत मार्गदर्शी सिद्धांतों का संकलन किया है, जिन्‍हें इस सुविधा के साथ प्राथमिक उधार देने वाले संस्‍थानों (पीएलआई) द्वारा विस्‍तारित किया जाएगा। प्राथमिक उधार देने वाले संस्‍थानों में शामिल हैं अनुसूचित बैंक और नेशनल हाउसिंग बैंक के साथ पंजीकृत आवास निधिकरण कंपनियां (एचएफसी)।

भारत में प्राथमिक उधार देने वाले संस्‍थानों द्वारा प्रस्‍तावित कुछ विपरीत बंधक योजनाएं इस प्रकार हैं:

आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तथा आंध्र बैंक जैसे संस्‍थानों ने निकट भविष्‍य में समान प्रकार की विपरीत बंधक योजना आरंभ करने की योजना बनाई है।

स्रोत: फिक्की के सहयोग से संकलित, दिनांक: २२-०५-२००७