रक्षा कार्मिक
सरकार ने सशस्त्र बलों में कार्य कर चुके वरिष्ठ नागरिकों को कुछ रियायतें प्रदान की हैं। सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों को यात्रा, स्वास्थ्य, आवास, पुन: नियोजन और पेंशन जैसे क्षेत्रों में विशेष लागत लाभ प्राप्त होते हैं। नीचे कई योजनाओं का उल्लेख किया गया है, जो संबंधित क्षेत्र में उन पर लागू होती हैं।
यात्रा रियायत
यात्रा रियायत सड़क, रेल और हवाई यात्रा के लिए उपलब्ध है। भारतीय रेलवे परमवीर चक्र, महावीर च्रक और वीर चक्र जैसे बहादुरी पुरस्कारों के विजेताओं को मेल अथवा एक्सप्रेस गाड़ियों के वातानुकूलित (एसी) II टियर डिब्बों और राजधानी गाड़ियों के एसी III टायर डिब्बों में मुफ्त यात्रा की अनुमति देता है।
जहां तक युद्ध में मारे गए रक्षा कार्मिकों को विधवाओं का संबंध है उन्हें दूसरी श्रेणी के यात्रा किराए में 75 प्रतिशत की छूट दी जाती है। बहादुरी पुरस्कार के विजेता स्तर I अथवा स्तर II के सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों को हवाई जहाज में यात्रा पर 75 प्रतिशत की छूट दी जाती है। 31 मार्च 2007 की स्थिति के अनुसार बहादुरी के लिए पुरस्कार पाने वाले सेवानिवृत्त रक्षा अधिकारियों को एयरलाइंस की टिकटों पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है।
चिकित्सा सुविधाएं
सेवानिवृत्त रक्षा कर्मचारियों को प्राप्त होने वाले लाभों में चिकित्सा सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। पूर्व सैनिक और उनके परिवार वाले किसी भी समय सेना अस्पतालों में अतरंग और बहिरंग रोगी के रूप में अपना इलाज करा सकते हैं। पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना से भी उन्हें बहुत मदद मिली है। गैर - पेंशनभोगी पूर्व सैनिक को चिकित्सा संबंधी उनके खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
यदि सेना कार्मिक सेना अस्पतालों में इलाज नहीं करा सकते हैं तो उन्हें 31 मार्च, 2007 की स्थिति के अनुसार अन्य अस्पतालों में इलाज कराने पर हुए खर्च के लिए केंद्रीय सैनिक बोर्ड से लगभग 75 से 90 प्रतिशत की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इससे उन्हें चिकित्सा संबंधी जरुरतों को आसानी से पूरा करने में मदद मिलती है।
पेंशन सुविधाएं
सशस्त्र बल कार्मिक की पेंशन की किस्म (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) का निर्धारण सेवानिव़ृत्ति अथवा सेवा से निर्मुक्ति के स्वरूप के अनुसार निर्धारित की जाती है। सेवा की निर्धारित अवधि पूरी होने पर सामान्य रूप से सेवानिवृत्त होने अथवा सेवा से निर्मुक्त होने पर सेवानिवृत्ति/ सेवा पेंशन प्रदान की जाती है। युद्ध से भिन्न किसी दुर्घटना में विकलांगता की स्थिति विकलांगता पेंशन की मंजूरी उपयुक्त चिकित्सा प्राधिकरण की सिफारिश पर दी जाती है। युद्ध अथवा युद्ध की तरह के अभियानों के दौरान घायल अथवा जख्मी होने वाले कार्मिक को एक विशेष पेंशन दी जाती है जिसे युद्ध में घायल के लिए पेंशन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) कहा जाता है।
सामान्यतया सेवानिवृत्ति पेंशन का हिसाब अंतिम 10 महीनों के दौरान आहरित औसत गणनीय परिलब्धियों के 50 प्रतिशत पर लगाया जाता है। रक्षा कार्मिकों को दी जाने वाली संराशीकृत पेंशन अधिकारियों के लिए 43 प्रतिशत और अधिकारी रैंक से नीचे के कार्मिकों के लिए 45 प्रतिशत है। 31 मार्च, 2007 की स्थिति के अनुसार असैनिकों को केवल ऐसी 40 प्रतिशत पेंशन मिलती है। ये सुविधाएं उन्हें सेवानिवृत्त होने के बाद भी अच्छा जीवन यापन करने में समर्थ बनाती हैं।
पारिवारिक पेंशन उन रक्षा कार्मिकों के आश्रितों को दी जाती है जिनकी सेवानिवृत्ति के बाद अथवा सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है। इन सुविधाओं का आशय सेवानिवृत्त कार्मिकों को वित्तीय दृष्टि से मजबूत बनाना तथा अन्य व्यक्तियों को रक्षा बलों में तैनाती के लिए प्रोत्साहित करना है।
बचत के साधन
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) अथवा एससीएसएस पूर्व रक्षा सेवा कार्मिकों को उपलब्ध एक उपयोगी साधन है। यह योजना हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई है और सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिक अपने जीवन में किसी की चरण पर इस योजना में निवेश कर सकते हैं।
31 मार्च, 2007 की स्थिति के अनुसार इस वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों और अन्यों को उनकी जमाराशि पर 9 प्रतिशत की दर पर ब्याज प्राप्त होता है। सरकार सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों और उनके आश्रितों के हित के लिए अन्य वित्तीय योजनाएं और कार्यक्रम भी शुरू कर रही है।
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना बचत बैंक का कार्य करने वाले किसी भी डाकघर उपलब्ध होती है। ऐसे 24 राष्ट्रीयकृत बैंक और एक निजी (प्राइवेट) क्षेत्र बैंक (आईसीआईसीआई) भी है जिनमें वरिष्ठ नागरिक बचत योजनाएं उपलब्ध हैं।
पूर्व सैनिकों का पुन: नियोजन
सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिक सेवानिवृत्ति के बाद भी जीविका अर्जन कर सकते हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पूर्व सैनिकों को केंद्र अथवा राज्य सरकार के पदों पर पुन:नियोजन हेतु कई रियायतें (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) प्रदान करती हैं। इसमें पदों का आरक्षण, आयु और शैक्षणिक योग्यताओं की छूट और आवेदन अथवा परीक्षा शुल्क से छूट और आवेदन अथवा परीक्षा शुल्क से छूट शामिल हैं। नौकरियां देते समय विकलांग पूर्व सैनिकों और मृत सेवा कार्मिक के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर विशेष प्राथमिकता दी जाती है। पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसरों (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के संबंध में कुछ बातें नीचे दी गई हैं:
- केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए समूह ''ग'' में 10 प्रतिशत और समूह ''घ'' में 20 प्रतिशत आरक्षित हैं।
- सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों और राष्ट्रीकृत बैंकों में समूह ''ग'' में 14.5 प्रतिशत और समूह ''घ'' में 24 प्रतिशत पद आरक्षित हैं।
- अर्द्ध सैनिक (पैरामिलिट्री) बलों में सहायक कमाडेंट 10 प्रतिशत पद भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित हैं।
पुनर्वास महानिदेशालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (डीजीआर) विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों और निजी क्षेत्र उद्योगों को सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने के लिए निजी पूर्व सैनिक एजेंसियों को पंजीकृत अथवा प्रायोजित करता है। कुछ राज्यों ने राज्य में सुरक्षा सेवाएं प्रदान करने के लिए अपने स्वयं के पूर्व सैनिक नियत किए है। लोक उद्यम विभाग ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों को अनुदेश जारी किए हैं कि वे राज्य पूर्व सैनिक निगमों अथवा डीजीआर द्वारा प्रायोजित सुरक्षा एजेंसियों से ही सुरक्षा कार्मिक नियुक्त करें। इस समय ऐसी लगभग 1800 ईएसएम सुरक्षा एजेंसियां हैं जो 1,10,000 से अधिक पूर्व सैनिकों को रोजगार प्रदान करती हैं।
सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों को लघु अथवा मध्यम स्तर का कारोबार स्थापित करने में मदद करने के लिए सरकार ने भी स्व-रोज़गार योजनाएं शुरू की हैं। पूर्व सैनिक II और III के लिए रोजगार योजना (सेम्फेक्स-II और सेम्फेक्स-III) और राष्ट्रीय इक्विटी निधि योजना ऐसी ही कुछ योजनाएं हैं। ये योजनाएं पूर्व सैनिकों को लघु व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण प्रदान करती हैं। ऋण की मंजूरी के लिए आवेदन पत्र ज़िला सैनिक बोर्ड को प्रस्तुत करना होता है।
पूर्व सैनिकों के लिए रोज़गार के अन्य अवसर कोयला परिवहन कंपनी योजना और कोयला टिपर योजना हैं। पेट्रोल पंप, एलपीजी और मिट्टी के तेल की डीलरशिप सेना की सेवा के दौरान विकलांग हुए कार्मिकों को आबंटित की जाती है। सार्वजनिक टेलीफोन बूथों के आंबटन में भूतपूर्व सैनिकों, विकलांग रक्षा कार्मिकों और विधवाओं को तरजीह दी जाती है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में भूतपूर्व सैनिक मदर डेरी बूथ, सब्जी स्टोर और संपीड़ित प्राकृतिक गैस केंद्र में संचालित कर रहे हैं।
आवास लाभ
आवास हर व्यक्ति के जीवन की एक अनिवार्य जरुरत है। चाहे आप रक्षा बलों से सेवानिवृत्ति प्राप्त व्यक्ति हों अथवा नियमित वरिष्ठ नागरिक जब स्वालंबी होने की बात करें तो आवास का बहुत महत्व होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों ने सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों को मकान अथवा ज़मीन की खरीद में मदद करने के लिए कई आयोजनाएं एवं स्कीमें बनाई हैं। पूर्व सेवा कार्मिक गृह निर्माण के लिए वित्तीय सहायता के लिए भी आवेदन कर सकते हैं।
सैनिक भवन अथवा सैनिक विश्रामगृह सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों और उनके आश्रितों को उपलब्ध अन्य आवास लाभ है। ये विश्रामगृह बहुत ही मामूली दरों पर मार्गस्थ सुविधाओं प्रदान करते हैं। इस समय पूरे देश में लगभग 238 सैनिक बोर्डों के कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।
सेना कल्याण आवास संगठन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) अथवा आवा एक ऐसी समिति है जो सेवारत व्यक्तियों, सेवानिवृत्त सेना कार्मिकों और सेना कार्मिकों की विधवाओं के लिए देश के चुनिंदा केंद्रों में मकानों का निर्माण करने के लिए जिम्मेदार है। हाल ही में, एडब्ल्यूएचओ ने घनिष्ठ अधिकृत (कमिशंड) अधिकारियोंऔर सेना के अन्य अधिकारियों की सुविधा के लिए किफायती मकानों के निर्माण के लिए 'जय जवान आवास योजना' कार्यक्रम शुरू किया है। ये मकान सैनिक छावनियों के नज़दीक बनाए जा रहे हैं ताकि वहां रहने वाले परिवारों को उस क्षेत्र के सैनिक अस्पतालों और सैनिक विद्यालयों की सुविधाएं आसानी से प्राप्त हो सकें।
स्रोत: फिक्की के सहयोग से संकलित, दिनांक: २२-०५-२००७ ![]()

