यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

आय कर

निजी आय पर लगने वाला कर आयकर कहलाता है, जिसे केंद्र सरकार को दिया जाता है। यह प्रत्यक्ष रूप से लगने वाला कर है, जिसे कोई व्यक्ति अथवा कंपनी/फर्म द्वारा एक निश्चित वित्तीय वर्ष के लिए भरा जाता है। आयकर विभाग केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) द्वारा नियंत्रित भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के अधीन राजस्व विभाग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के अंतर्गत कार्य करता है।

कराधान से संबंधित सभी प्रकार की विस्तृत जानकारी यहां से प्राप्त की जा सकती है।

आयकर अधिनियम, 1961 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के खंड 139 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) में वित्त अधिनियम 2010 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के अंतर्गत कुछ बदलाव किए गए हैं, जिससे हर उस व्यक्ति के लिए आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी आय आयकर देने की सीमा में आती हो। साथ ही ऐसे लोग भी इसके दायरे में आ गए हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष के लिए निर्धारित अधिकतम राशि का आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था तथा वह राशि आयकर के दायरे में नहीं थी।

किसी भी ऐसे व्यक्ति को रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है, जो आधिकारिक राजपत्र में निर्दिष्ट किसी ऐसे क्षेत्र में रहता है, जो सरकार द्वारा कर मुक्त घोषित की गई हो। आयकर अधिनियम के उप खंड में इसका प्रावधान है। हालांकि यदि ऐसे क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति पचास हजार रुपए या इससे अधिक की विद्युत खपत का बिल भरता है तो वह कर के दायरे में स्वतः ही आ जाएगा या फिर निम्नलिखित में से वह किसी भी श्रेणी में है तो भी उसे कर देना होगाः

  • अचल संपत्ति के व्यवसाय में हो तथा निर्दिष्ट से अधिक क्षेत्र का मालिक हो, किराएदार हो अथवा जो भी उल्लेखित हो; अथवा
  • यदि वह दो पहिया वाहन के अलावा किसी भी अन्य किसी मोटर वाहन का मालिक है या फिर पट्टे पर लिया हो, जिसमें चार पहिये हो तथा मोटर चलित हो। या फिर दो पहिया वाहन में दो अतिरिक्त पहिये जोड़कर उसे चार पहिया बनाया हो; अथवा
  • खुद की अथवा किसी अन्य की विदेश यात्रा का व्यय वहन किया हो; अथवा
  • यदि किसी बैंक या संस्थान द्वारा जारी किए गए क्रेडिट कार्ड का धारक हो। “जोड़े वाला क्रेडिट कार्ड यानी एड ऑन कार्ड” नहीं।; अथवा
  • किसी ऐसे क्लब का सदस्य हो, जिसका सदस्यता शुल्क पचीस हजार रुपए या उससे अधिक हो।

कर देयता का मूल्यांकन वर्ष 2010 -2011 के तहत इस प्रकार किया गया है:-

(i) व्यक्तियों के मामले में (महिलाओं तथा उन पुरुषों के अलावा, जिनकी उम्र वित्तीय वर्ष 2009-10 के दौरान 65 वर्ष या अधिक थी) -

आय (रुपए में) : कर जवाबदेही (रुपए में)

  • 1,60,000 रुपए तक: कर देयता नहीं
  • 1,60,001 रुपए से 3,00,000 रुपए तक: 10% का आयकर
  • 3,00,001 रुपए से 5,00,000 रुपए तक: 14,000 + 20% का आयकर
  • 5,00,000 रुपए से अधिक की आय पर: 54,000 + 30% का आयकर

(ii) महिलाओं के मामले में (महिलाओं तथा उन पुरुषों के अलावा, जिनकी उम्र वित्तीय वर्ष 2009-10 के दौरान 65 वर्ष या अधिक थी)-

आयकर (रुपए में): कर जवाबदेही (रुपए में)

  • 1,90,000 : कर देयता नहीं
  • 1,90,001 रुपए से 3,00,000 रुपए तक: 10% का आयकर
  • 3,00,001 रुपए से 5,00,000 रुपए तक: 11,000 + 20% का आयकर
  • 5,00,000 रुपए से अधिक की आय पर: 51,000+ 30% का आयकर

(iii) उन लोगों के लिए जिनकी उम्र वित्तीय वर्ष 2009-10 के दौरान 65 वर्ष या अधिक थी-

आयकर (रुपए में): कर देयता (रुपए में)

  • 2,40,000 रुपए तक: कर देयता नहीं
  • 2,40,001 रुपए से 3,00,000 रुपए तक: 10% का आयकर
  • 3,00,001 रुपए से 5,00,000 रुपए तक: 6,000 + 20% का आयकर
  • 5,00,000 रुपए से अधिक की आय पर: 46,000 + 30% का आयकर

कर देयता गणना पर अधिक जानकारी यहां (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) से पाई जा सकती है।

आयकर रिटर्न दाखिल करना (आईटीआर) हर उस व्यक्ति के लिए कानूनी रूप से आवश्यक है, जिसकी कुल आय आयकर अधिनियम 1961 के मुताबिक तय सीमा से अधिक है। आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए आईटीआर प्रपत्र भरना आवश्यक है। इसके साथ ही मूल्यांकन वर्ष के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज भी जमा करना पड़ता है। आयकर मूल्यांकन वर्ष 2010-2011 के लिए निम्न लिखित आईटीआर प्रपत्र भरने होंगे:

और अधिक निर्देशों एवं प्रपत्रों तथा पिछले वर्षों के प्रपत्र यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) से प्राप्त किए जा सकते हैं।

रिटर्न दाखिल करना आवश्यक प्रक्रिया है। यह जरूरी नहीं है कि नियोक्ता ने स्रोत पर कर काटा ही हो और न ही यह जरूरी है कि वह आयकर वापसी के लिए योग्य है या नहीं। आईटीआर दाखिल करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन ई-फाइलिंग के तरीके से भी किया जा सकता है और मैनुअल भी।

मैनुअल तरीके से आईटीआर प्रपत्र भरकर उसे क्षेत्र के आयकर विभाग या कार्यालय में जाकर जमा करने के बाद यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। अपने क्षेत्र की जानकारी यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) से प्राप्त की जा सकती है।

आयकर को इंटरनेट की मदद से ऑनलाइन भरने की प्रक्रिया को आयकर रिटर्न ई-फाइलिंग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) कहते हैं। ऑनलाइन कर भुगतान की इस प्रकिया को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वर्ष 2006-07 में लागू किया था। साथ ही कंपनी कर दाताओं के लिए ई-फाइलिंग अनिवार्य कर दी गई है। वर्तमान में सभी कंपनियों तथा फर्म के लिए अनुच्छेद 44एबी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के तहत सांविधिक ऑडिट तथा आयकर रिटर्न को ई-फाइल करना आवश्यक है। ई-फाइलिंग की सुविधा न्यासों के अलावा सबके लिए उपलब्ध की जा चुकी है।

ई-फाइलिंग के जरिए कर रिटर्न दाखिल करने के बारे में अधिक जानकारी यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) से प्राप्त की जा सकती है।

स्‍थायी खाता संख्‍या (पीएएन)

पैन अखिल भारतीय 10 अक्षरों का एक विशिष्‍ट कोड है जो आयकर विभाग द्वारा लेमिनेटेड कार्ड के रूप में जारी किया जाता है आपके लिए यह जीवन भर स्‍थायी रहेगा और आपके पते या रहने के स्‍थान में बदलाव आने से या आपके आकलन अधिकारी बदलने से नहीं बदलेगा। विवरणी भरने के लिए पैन होना अनिवार्य है। आयकर विभाग द्वारा आय विवरणी तथा देश में किसी आयकर प्राधिकारी के साथ पत्र व्‍यवहार में पैन का जिक्र करना अनिवार्य बना दिया गया है। पैन, अखिल भारतीय स्तर पर विशिष्ट संख्या वाला स्थायी क्रमांक होता है।

आयकर विभाग ने सुनिश्चित किया है कि पैन के लिए आवेदन करना सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया है। पैन आवेदन को यूटीआई इन्‍वेस्‍टर सर्विसेज लिमिटेड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) ने विभिन्‍न शहरों में आईटी पैन सेवा केन्‍द्र का प्रबंधन करने का जिम्मा दिया है। इसके लिए आयकर कार्यालयों तथा नेशनल सिक्‍युरिटीज डिपोजेटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के जरिए पैन तथा टिन सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं।

आपको केवल अपेक्षित आवेदन प्रपत्र संख्‍या 49ए (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) जमा करने की आवश्‍यकता है। पैन का आवेदन पत्र आयकर विभाग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) अथवा यूटीआईआईसएएल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) या एनएसडीएल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की वेबसाइट से डाउनलोड भी किया जा सकता है। यह आवेदन पत्र आयकर पैन सर्विस केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) तथा टिन सुविधा केंद्रों (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) से भी डाउनलोड कर सकते हैं।

पैन कार्ड से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) क्लिक करें।

आयकर विभाग की ओर से नेशनल सिक्युरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) निम्न सेवाएं प्रदान करता हैः

यूटीआई तकनीकी सेवा निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध कराती हैः

कर छूट

आयकर अधिनियम के तहत आयकर की गणना करने के बाद धारा 80सी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के तहत करों में राहत तथा छूट दी जाती है। इसी राहत को कर में छूट कहा जाता है।

कर में छूट को आयकर में कमी नहीं बल्कि सिर्फ आय में कटौती से है। कोई भी व्यक्ति वित्तीय वर्ष के शुरुआत मे ही कई तरीकों से निवेश कर सकता है, जिससे उसके द्वारा दिए जाने वाले कर में छूट मिल सके। इससे उसके द्वारा दिए जाने वाले कर तथा रिटर्न में तुलनात्मक रूप में कमी आ जाती है।

टैक्स बचाने के लिए सामान्यतः, सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ), एनएससी/एनएसएस, सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), जीवन बीमा प्रीमियम, कर्मचारी भविष्य निधि योजना इत्यादि मे निवेश किया जाता है।

कर गणना तथा कर छूट पर और अधिक जानकारी के लिए यहां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) क्लिक करें।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 22-06-2010