धूम्रपान
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (15 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है।)
के अनुसार भारत में 25-69 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 6,00,000 मनुष्य प्रतिवर्ष धूम्रपान के कारण मरते हैं। और बहुत से बिना प्रतिरोध के धूम्रपान से प्रभावित हैं। इन मौतों को, जीवनशैली में भोजन, व्यायाम और तनाव प्रबंधन जैसे कुछ बदलाव लाकर आसानी से रोकथाम की जा सकती है।
धूम्रपान करने वाले अलग-अलग लोगों के लिए, उनकी अद्वितीय स्थिति के आधार पर अलग-अलग रोगोपचार की जरुरत होती है। धूम्रपान छोड़ने का एक सामान्य तरीका है, धूम्रपान बन्द करें कार्यक्रम में सम्मिलित होना। धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक समान विचार वाले लोगों के लिए स्थानीय गैर सरकारी संगठन व अन्य समूह ऐसे कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों द्वारा, कैसे धूम्रपान छोड़ा जाए व स्वस्थ रहा जाए के संबंध में बहुत से उपाय सुझाए जाते हैं। धूम्रपान करने वालों की मदद के लिए गाइड बुक्स, वीडियो टेप्स, आडियो टेप्स की सिफारिश की जाती है, ताकि वे इस आदत को छोड़ सकें।
यदि आप धूम्रपान छोड़ने की सोच रहे हैं तो, पुनर्वास के लिए एक अच्छा समय चुन लें। तब छोड़ने की कोशिश न करें जब आप बहुत अधिक तनाव में अथवा अवकाश पर हों। भिन्न-भिन्न धूम्रपान करने वालों के, धूम्रपान छोड़ने के प्रयासों के संबंध में अलग-अलग अनुभव होते हैं। कुछ को उनींदापन (स्लीपी), अत्यधिक उत्तेजित, चंचल, अधीर, अथवा चिड़चिड़ापन महसूस होता है जब कि अन्य तंबाकू अथवा मीठे की अभिलाषा करते हैं अथवा उनको सिरदर्द होता है। नियमित व्यायाम, प्रात:कालीन भ्रमण, भरपूर नींद, संतुलित आहार और भरपूर पानी पीने के द्वारा पुनर्वास की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं।
तम्बाकू पुनर्वास का दूसरा रोगोपचार है निकोटिन पुन: स्थापन (रीप्लेसमेन्ट)। इसके द्वारा निकोटिन व्यसन की सुध लेती है ताकि धूम्रपान करने वाला अपनी आदत को छोड़ सके। इन उत्पादों की अभिकल्पना, सिगरेट की चाहत को कम करने और धूम्रपान छोड़ने का प्रयास करने के समय लोगों को वापसी के लक्षणों से मुक्ति प्रदान करना है। निकोटिन रोगोपचार के कुछ तरीके हैं निकोटिन च्युइंग गम, निकोटिन पैचइज़्, श्वास यंत्र (इनहेलर), नेज़ल स्प्रे और गोलियां। इन उत्पादों में सिगरेटों में उपस्थित निकोटिन की तुलना में कम निकोटिन पैदा होती है, साथ ही इनमें तारकोल (टा) व अन्य गैसें नहीं होती हैं।
धूम्रपान करने वालों को विशेषज्ञों के साथ परामर्श, ड़्रग रोगोपचार, योग, ध्यान और सामाजिक सहायता लेनी पड़ सकती है। कुछ चिकित्सक, जो कि तम्बाकू के व्यसनियों को अपनी लत छोड़ने में सहायता कर रहे हैं, वैकल्पिक रोगोपचार जैसे गरम पानी में स्नान, सम्मोहन, रेकी और एक्यूपंचर पद्धतियों का प्रयोग कर सकते हं।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


