स्वच्छता
व्यक्तिगत व सामुदायिक स्तरों पर रोग मुक्त रहने के लिए उचित स्वच्छता बहुत जरूरी है। भारत में, विशेषकर गरीबों व ग्रामीणों में, स्वच्छता की उचित सुविधाएं न होने के कारण बहुत से रोग होते हैं। लोगों को उचित स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराकर, इन रोगों की रोकथाम की जा सकती है, तथा कइयों को मरने से बचाया जा सकता है।
यद्यपि उचित स्वच्छता का दायित्व सरकार पर है, तथापि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक समुदाय व इसके रहवासी भी व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए कदम उठाते हैं।
स्वच्छता के लिए नीचे दिए गए सुझावों का अनुसरण करके एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है:
- शौचालयों का पर्याप्त उपयोग करें तथा मल-मूत्र के उचित प्रबंधन व निपटान पर पर्याप्त ध्यान दें।
- भोजन करने से पहले व बाद में तथा शौचालय का प्रयोग करने के बाद सदैव अपने हाथ धोएं।
- कभी-भी लम्बी समयावधि के लिए खुले बर्तनों में पानी इक्कठा न करें। जल से बर्तनों को धोना चाहिए और यदि संभव हो सके तो नियमित अंतराल पर रोगाणुओं से मुक्त किए जाने चाहिएं।
- भोजन को सदैव, दूषित जल एवं भूमि के संपर्क से बचाकर/दूर सुरक्षित रखना चाहिए। मांस व दूध उत्पादनो को सुरक्षित रखने के लिए, विशेषकर जहां शीतागार (कोल्ड स्टोरेज) की सुविधा नहीं है, विशेष सावधानी बरतने की जरुरत होती है।
- कुछ खाद्य पदार्थों जैसे बिना बोतल वाले पेय पदार्थ, आइस क्यूब्स, बिना पैक किया हुआ दूध, क्रीम और आइस क्रीम, ठन्डा अथवा अधपका मांस, मछली, अन्डों के व्यंजनों के खाने से परहेज करें।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


