- भारत व अन्य देशों में पोलियों के अद्यतन मामले (-1 MB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है)

- पल्स पालियों अभियान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनीशिएटिव (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पश्चिम बंगाल में पल्स पोलियो अभियान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
पोलियो
पोलियोमाइलाइट्स अथवा पोलियो एक संक्रामक रोग है जो कि एक वायरस से होता है। यह नाड़ी तंत्र पर आक्रमण करता है और कुछ ही घण्टों के अन्दर पूर्ण पक्षाघात हो सकता है। पोलियो का आक्रमण किसी भी आयु में हो सकता है, परन्तु आमतौर पर यह तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), के अनुसार भारत में वर्ष 2006 के दौरान पोलियोमाइलाइट्स के 660 पक्के मामले थे। वायरस मुख के द्वारा शरीर में प्रविष्टि होता है तथा आंत में बढ़ता है। इसके प्रारंभिक लक्षण हैं, बुखार, सिरदर्द, उल्टी और गर्दन में अकड़न तथा जोड़ों में दर्द। 200 में से एक (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं). संक्रमण में अनपलट पक्षाघात होता है। यह पक्षाघात आम तौर पर टांगों में होता है।
निवारण उपाय
अभी तक पोलियो का कोई इलाज नहीं है, इसकी प्रतिरक्षण द्वारा केवल रोकथाम की जा सकती है। पोलियो वैक्सीन कई बार दिए जाने पर यह सदैव बच्चे को जीवन भर के लिए रक्षा प्रदान करता है। पूर्ण प्रतिरक्षण सुस्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति में पक्षाघातिक पोलियो विकसित होने के जोखिम को कम करता है। यद्यपि यह अधिकांश व्यक्तियों की रक्षा करता है, परन्तु ऐसे कुछ व्यक्ति जो वैक्सीन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं दिखा पाते अब भी रोग ग्रस्त हो सकते हैं।
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स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल

