यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

शारीरिक रूप से अशक्‍त

शारीरिक रूप से अशक्‍त लोगों का पुनर्वास करना, सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की एक और प्राथमिकता है। जिला अशक्‍तता पुनर्वास केंद्रों (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), संस्‍थानों और गैर सरकारी संगठनों के माध्‍यम से इन्‍हें विशेष देखभाल उपलब्‍ध कराई जाती है। शारीरिक अक्षमता वाले लोगों में, दुर्बल आंखों वाले, सुनाई देने में बाधाग्रस्‍त, और छिन्‍नांग (ऐम्‍प्‍यूटी) सम्मिलित हैं। अशक्‍त लोगों को, उनकी क्षति (इन्‍जरी) की सीमा के आधार पर भिन्‍न प्रकार के पुनर्वास की जरुरत होती है। रोगियों का मूल्‍यांकन विशेषज्ञों के एक दल द्वारा किया जाता है और उन्‍हें उनके परिवारों के साथ परामर्श दिया जाता है। पुनर्वास में, किसी रोगी को अपनी अशक्‍तता के साथ संतोषजनक स्‍तर का जीवन जीने की प्रक्रिया में सहायता प्रदान करना सम्मिलित हैं।

दृष्टिहीनों के पुनर्वास में, साइटेड गाइड तकनीक, सफेद छड़ी का प्रयोग, ब्रेल भाषा का लिखना और पढ़ना, और बिना दृष्टि के घरेलू कार्य करना, को सीखना सम्मिलित हैं। उन्‍हें उन क्षेत्रों में दस्‍तकारी का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है जिनमें दृष्टिहीनता बाधा नहीं है, जैसे मोमबत्‍ती बनाना व अन्‍य शिल्‍पकारी करना। कुछ को चाक्षुष सहायक सामग्री (विजुअल एड्स) उपलब्‍ध कराई जा सकती है।

ऐसे लोगों, जिनका एक अंग (लिम्‍ब) किसी रोग अथवा दुर्घटना के कारण चला गया है, को पुन र्निमाणकारी शल्‍य चिकितसा (री-कन्‍स्‍ट्रक्टिव सर्जरी) प्रदान की जाती है। बाद में उन्‍हें जयपुर पांव जैसे नकली अंग, कैलीपर्स (परकार) अथवा बैसाखियाँ उपलब्‍ध कराई जा सकती हैं। तब उनको जो नई सहायता (एड) प्रदान की गई है, के साथ कैसे चला जाए, यह सिखाया जाता है और रोजगार प्राप्‍त करने में सहायता देने के लिए उन्‍हें दस्‍तकारी का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

गूंगे और बहरे लोगों को शल्‍य क्रिया करवाने का परामर्श दिया जा सकता है अथवा उनकी विश्ष्टि स्थिति के अनुसार उन्‍हें श्रवण यंत्र (हीयरिंग एड) अथवा कर्ण सांचा (ईयर मोल्‍ड) लगाए जा सकते हैं। जिन्‍होनें अभी तक बोलना नहीं सीखा है (पांच वर्ष से कम आयु के बच्‍चे) को वाणी सुधार का इलाज प्रदान किया जाता है जिसमें इंगित भाषा, ओष्‍ठ पठन व अन्‍य संकेत सम्मिलित हैं।

उनकी स्थिति के आधार पर, कुछ अशक्‍त व्‍यक्तियों को इलाज और भिन्‍न प्रकार की शल्‍य क्रिया कराने के लिए भी सुझाव दिया जा सकता है। सभी मामलों में पुनर्वास प्रक्रिया में अनुवर्ती इलाज भी प्रदान किया जाता है जिसमें आवधिक अंतराल पर रोगियों की दुबारा जांच की जाती है।

अशक्‍तताओं का प्रबंध करने वाले अस्‍पताल व संस्‍थान

अधिक विवरण के लिए नीचे दर्शाए गए लिंक्‍स पर क्लिक करें:

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल