दर्द प्रबंधन
तीव्र दर्द एक ऐसा मुख्य कारण है जिसके कारण लोग डॉक्टरी चिकित्सा की मांग करते हैं। तीन प्रकार के दर्द होते हैं – तीव्र, जीर्ण और अंतिम (टर्मिनल)। तीव्र दर्द में, कारण की आसानी से पहचान की जा सकती है, तथा उचित इलाज के द्वारा रोगी कुछ ही हफ्तों अथवा महीनों में अच्छा होने लगता है। जीर्ण दर्द में, रोग के लक्षणों की आसानी से पहचान नहीं हो पाती है और सही इलाज का पता लगाने में काफी कुछ समय लग सकता है। अंतिम (टर्मिनल) दर्द में, टर्मिनल रोगों जैसे कैंसर से ग्रस्त रोगियों के दर्द और कष्ट को कम करना सम्मिलित है। दर्द से स्वास्थ्य लाभ की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध है।
दर्द से स्वास्थ्य लाभ प्रबंधन में, विविध शास्त्रों (मल्टी डिसिप्लनरी), जिनमें औषधशास्त्र के उपाय, औषधशास्त्र से इतर उपाय, और मनोवैज्ञानिक उपाय सम्मिलित हैं, की पहुंच आवश्यक है।
- औषधशास्त्र उपायों में पीड़कनाशक जैसे कि स्वापक अथवा नॉन स्टेरोइडल एन्टी इनफ्लेमेट्री नशीली दवा (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (एन एस ए आई डीज़) और दर्द मोडीफायर्स जैसे कि ट्राइसाक्लिक एन्टी डिप्रेसेन्ट्स अथवा एन्टी कन्वलसेन्ट्स सम्मिलित हैं।
- औषधशास्त्र से इतर उपायों में, इन्टरवेन्शनल प्रोसीज़र, शारीरिक चिकित्सा (फिज़ीकल थेरेपी), शारीरिक व्यायाम और बर्फ और/अथवा ताप का उपयोग, सम्मिलित हैं।
- मनोवैज्ञानिक उपायों में, बायो फीड बैक और ज्ञानात्मक चिकित्सा (काग्नीटिव थेरेपी), सम्मिलित हैं।
इन्टरवेन्शनल प्रोसीज़रों का प्रयोग आमतौर पर जीर्ण (क्रोनिक) पीठ दर्द में किया जाता है। इसमें एपीड्यूरल स्टेरोइड इन्जेक्शन, फेसेट ज्वाइन्ट इन्जेक्शन, न्यूरोलाइटिक ब्लाक्स, स्पाइनल कोर्ड स्टीम्यूलेटर्स और इन्ट्राथेकल ड्रग डिलीवर सिस्टम इम्प्लान्ट्स, सम्मिलित हैं।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


