- राष्ट्रीय पोषण संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- एकीकृत बाल विकास सेवाएं (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- संतुलित आहार (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के पोषण प्रकाशन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- लम्बाई व वजन की मानक सारिणी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
पोषण
भारत में बच्चों को पर्याप्त पोषण देना एक बहुत गंभीर समस्या है। बच्चों में पोषण का सुधार करने के लिए सरकार के उपायों में तीन कदम सम्मिलित हैं:
- राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय नीतियों के द्वारा कुपोषण और जन्म के समय कम वजन के मामलों में कमी लाने की प्रतिबद्धता।
- समुदाय आधारित प्रयासों का उपयोग करके कुपोषण की समस्या और बच्चों के विकास पर ध्यान देना।
- विटामिन ए व खनिज (मिनरल) की कमियों को दूर करने के लिए विटामिन ए और आयरन संपूरक उपलब्ध कराना।
अद्यतन यूनीसेफ (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) आंकडों से यह विदित होता है कि तीन वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों में से 46 प्रतिशत बच्चे अपनी आयु की तुलना में बहुत छोटे हैं, 47 प्रतिशत कम वज़न के हैं और कम से कम 16 प्रतिशत नष्ट हो जाते हैं। इनमें से कई बच्चे गंभीर रुप से कुपोषित हैं।
आपके बच्चों को पोषणयुक्त आहार देने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:
- अपने बच्चे को विभिन्न प्रकार के पौष्टिक आहार जैसे पत्तेदार हरी सब्जियां, ताजे फल, फलियां और इसी प्रकार के अन्य आहार दें।
- अपने बच्चे को भरपूर अनाज खाने के लिए प्रोत्साहित करें, परन्तु उनमें अधिमानत: साबुत अनाज खाने की आदत डालें।
- बच्चे के विकास के लिए दूध व दूध से बनी वस्तुएं बहुत आवश्यक हैं। ये कैल्शियम के अच्छे स्रोत के रूप में काम करते हैं जिनसे दांत व हड्डियां मजबूत बनते हैं। दो वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए मलाई निकाले हुए कम चिकनाई युक्त दूध लेने की सिफारिश नहीं की जाती है, परन्तु किशोरवय बच्चे और तरुण निश्चित रूप से कम चिकनाई युक्त दूध की किस्म ले सकते हैं।
- जहां तक मांसाहारी भोजन लेने का प्रश्न है, अपने बच्चों को बिना चरबी का मांस, मछली और मुर्गा-मुर्गी लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
- किशोरवय बच्चों के द्वारा मद्यसार (एल्कोहल) करने की बिल्कुल सिफारिश नहीं की जाती है।
- ऐसी खाद्य सामग्रियों का चयन करें जिनमें नमक व मसाले कम हों।
- ऐसा भोजन लेने से परहेज करें जिनमें चीनी और चिकनाई की मात्रा अधिक है।
- जहां भोजन पकाने की बारी आती है, तो पकाने के लिए भपारा (भाप में पकाने), उबालने और पकाने (बेकिंग) का प्रयोग करें न कि तलने का। तलने में तेल का अधिक प्रयोग होता है, और इस प्रकार खाद्य वस्तु में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, परन्तु पोषण तत्व कम हो जाते हैं।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


