चिकित्‍सा विधिक

भारत में, चिकित्‍सा विधिक विशेषज्ञता अपेक्षाकृत एक नया व्‍यवसाय है। अत: दुर्घटनाओं, अस्‍पतालों में इलाज, और रोगी-डॉक्‍टरों के मध्‍य शिकायतों से संबंधित समस्‍याओं को निपटाने वाले विधि विशेषज्ञों का भारत में अभी तक भली प्रकार विकास नहीं हुआ है। चिकित्‍सा विधिक विशेषज्ञों की भारतीय संघ (आई ए एम एल) को चिकित्‍सा विधिक (मेडिको लीगल) मामलों की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। चिकित्‍सा विधिक (मेडिको लीगल) विशेषज्ञता की आवश्‍यकता न्‍याय आयुर्विज्ञान (फोरेन्सिक मेडिसिन), मेडिकल विधिशास्‍त्र और विष विज्ञान में होती है।

अधिकांश बीमा कम्‍पनियां किसी न किसी रूप में चिकित्‍सा विधिक (मेडिको लीगल) मुद्दों को कवर करती हैं (का ध्‍यान रखती हैं)। उदाहरण के लिए नई भारतीय बीमा कंपनी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) चिकित्‍सकों और चिकित्‍सा पेशे से जुड़े लोगों के लिए प्रोफेशनल इंडेमिनिटी पॉलिसी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) उपलब्‍ध कराती है। यह पॉलिसी, उनके द्वारा अपनी व्‍यावसायिक सेवाएं प्रदान करते समय हुई गलतियों और त्रुटियों के कारण उन पर आने वाली जिम्‍मेदारियों को कवर करती है।

यह पॉलिसी सतत् नवीकरण पर पूर्व व्‍यापी (रीट्रो एक्टिव) लाभ उपलब्‍ध कराती है जिससे, पहली बार पॉलिसी प्रारंभ होने के बाद पहले की अवधि से संबंधित ऐसे दावे जिनकी जानकारी परवर्ती नवीकरण के दौरान प्राप्‍त होती है, भी भुगतान के लिए देय हो जाते हैं। किसी चिकित्‍सालय अथवा मेडिकल संस्‍थान अथवा विभाग के सदस्‍यों को कवर करते हुए ग्रुप पॉलिसियां भी जारी की जा सकती हैं। प्रीमियम पर ग्रुप डिस्‍कॉउन्‍ट भी दिया जाता है जो कि कवर किए गए सदस्‍यों की संख्‍या पर निर्भर करता है। दूसरी व्‍यावसायिक क्षतिपूर्ति पॉलिसी यूनाइटेड भारतीय बीमा कम्‍पनी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा 1958 में स्‍थापित केंद्रीय चिकित्‍सा विधिक परामर्शदात्री समिति का संज्ञान लेते हुए मध्‍य प्रदेश सरकार द्वारा भोपाल में चिकित्‍सा विधिक संस्‍थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (मेडिको लीगल इन्‍स्‍टीट्यूट) स्‍थापित किया गया है। इस संस्‍थान के कार्य क्षेत्र की प्रकृति अर्ध न्‍यायिक (क्‍वासी जुडिशियल) है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल