गुर्दे का रोग

गुर्दे का रोग वह बीमारी या विकृति है जो फिल्‍टरेशन, पुनरवशोषण तथा स्रवण के संबंध में गुर्दों के कार्यों को दुष्‍प्रभावित करती है। गुर्दे के रोग आनुवंशिक, जन्‍मजात या उपार्जित हो सकते हैं।

भारत में हर वर्ष लगभग 2,00,000 लोग गुर्दे की विफलता का शिकार (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) होते हैं। अन्‍य लाखों लोग गुर्दे के कम तीव्र रोगों से पीडित होते हैं। इसे देखते हुए राष्‍ट्रीय वृक्‍क प्रतिष्‍ठान (भारत) जैसी स्‍वैच्छिक संस्‍थाएं स्‍थापित की गई हैं ताकि गुर्दे की बीमारी पर जानकारी तथा परामर्श की निरंतर बढ़ रही जरूरत को पूरा किया जा सके।

गुर्दे के रोग का निवारण

  • गुर्दे के चिरकाली रोग का निवारण अन्‍य रोगों या कारकों का नियंत्रण करके किया जा सकता है जो गुर्दे के रोग में योगदान कर सकते है।
  • रक्‍त चाप के स्‍तर का नियंत्रण।
  • स्‍वस्‍थ वजन बनाए रखें। यह अन्‍य रोगों से बचाव में भी मदद कर सकता है, य‍था मधुमेह, उच्‍च रक्‍त चाप, और ह्दय रोग।
  • वसा (लिपिड) के स्‍वस्‍थ स्‍तरों के लिए जांच करें यथा ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्‍ट्रोल।
  • धूम्रपान से ऐथिरोस्‍क्‍लेरोसिस हो सकता है, जो गुर्दे को रक्‍त प्रवाह कम करता है और रक्‍त चाप बढ़ाता है। अत:, धूम्रपान और तंबाखू के किसी भी उत्‍पाद का प्रयोग न करें।

भारत में गुर्दे की समस्‍या का इलाज करने वाले अस्‍पताल/क्लिनिक:

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल