काला अजार
काला अजार एक धीरे-धीरे पनपने वाला रोग है जो लीशमैनिया जीनस के परजीवियों के कारण होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह रोग तीन देशों में पाया जात है - बांग्लादेश, भारत और नेपाल। इस प्रदेश में लगभग 147 मिलियन लोगों (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को इस रोग का "खतरा" है।
भारत में यह रोग बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल के पूर्वी राज्यों में पाया जाता है। रोग अधिकतर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब लोगों को प्रभावित करता है। इस रोग के प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रीय वेक्टरवाहित रोग कार्यक्रम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) चल रहा है। राष्ट्रीय वेक्टर वाहित रोग नियंत्रण कार्यक्रम निदेशालय (एनवीबीडीसीपी) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) वेक्टर वाहित रोगों के निवारण और नियंत्रण के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी है यथा मलेरिया, डेंगू, लिंफेटिक फाइलेरियासिस, काला अजार और भारत में जापानी एन्सेफेलाइटिस। यह स्वास्थ्य सेवा महा निदेशालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), भारत सरकार का एक तकनीकी विभाग है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, भारत सरकार ने काला अजार की औषधियां, कीटनाशी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई। राज्य सरकारों ने अपने प्राथमिक स्वास्थ्य रक्षा तंत्र के माध्यम से इस कार्यक्रम को लागू किया। नीति को लागू करने में निहित अन्य खर्चे जिला, क्षेत्रीय तथा राज्य मलेरिया नियंत्रण संगठनों ने उपलब्ध कराए।
काला-अजार से निपटने के लिए सरकार ने 1990-91 में रोग-प्रभावित क्षेत्रों में एक समर्थित नियंत्रण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम की नीति में जमीन से 6 फीट की ऊंचाई तक डाइक्लोरो-डाइफिनाइल-ट्राइक्लोरोईथेन (डीडीटी) के साथ भीतरी अवशेष फुहार (आईआरएस) द्वारा वेक्टर नियंत्रण शामिल है। यह वर्ष में दो बार की जाती है। कार्यक्रम की अन्य नीतियां शीघ्र निदान, पूर्ण उपचार और क्षमता निर्माण हैं। इस कार्यक्रम की सफलता के फलस्वरूप, 1992 की तुलना में 2003 में काला अजार के मामलों की संख्या 76 प्रतिशत कम हो गई। सरकार का लक्ष्य 2010 तक इस रोग का पूरी तरह उन्मूलन कर देने का है। उन्मूलन कार्यक्रम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) 100 प्रतिशत केंद्र द्वारा समर्थित है। औषधियों और कीटनाशियों के अतिरिक्त, केंद्र दिसंबर 2003 से इस रोग वाले राज्यों को नकद सहायता भी दे रहा है ताकि नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
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स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


