आईआरडीए तथा बीमा लोकपाल (ओम्‍बड्समैन)

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की स्‍थापना संसद के अधिनियम आईआरडीए अधिनियम, 1999 (जिप - 32.4KB) द्वारा की गई थी, आईआरडीए का उद्देश्‍य पालिसी धारकों के हितों की रक्षा करना, बीमा उद्योग को विनियमित करना, इसका संवध्रन करना और इसका व्‍य‍वस्थित विकास सुनिश्चित करना तथा अन्‍य संबंधित मामलों को देखना है।

बीमा लोकपाल(बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के पद का सृजन भारत सरकार की अधिसूचना द्वारा नवम्‍बर 1998 में किया गया। इसका मुख्‍य कार्य बीमाकृत व्‍यक्तियों की शिकायतों का तत्‍काल निपटान करना तथा शिकायतों के निपटान में आने वाली समस्‍याओं को कम करना है। यह संस्‍था महत्‍वपूर्ण है और पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करने से संबंद्ध हैं और साथ ही उनके पद्धति में विश्‍वास को एक आकार प्रदान करती है। बीमा लोकपाल की उपस्थिति न उपभोक्‍ताओं और बीमाकर्ता दोनों में समान निष्‍ठा और विश्‍वास पैदा करने में सहायता की है।

लोकपाल कई क्षेत्रों जैसे सिविल सेवा, बीमा उद्योग और न्‍यायिक सेवाओं से चुने जाते है। उन्‍हें तीन वर्ष की अवधि के लिए अथवा उनके 60 वर्ष की आयु का होने तक नियुक्‍त किया जाता है। वर्तमान में देश के विभिन्‍न भागों में बारहवी बीमा लोकपाल नियुक्‍त है। उन सभी के निर्धारित क्षेत्राधिकार हैं।

द इंश्‍योरेंस अधिनियम 1935 (वर्ड - 942KB) , आईआरडीए एक्‍ट 1999 (जिप - 32.4KB) और आईआरडीए (माइक्रो इंश्‍योरेंस इंश्‍योरेंस) 2005 (-1 MB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) अन्‍य नियमों तथा विनियमों की जानकारी(बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल