आयोडिन की कमी

आयोडिन की कमी से होने वाले विकार अथवा आईडीडी विश्‍व में निवारणीय मस्तिष्‍क क्षति और मानसिक रूप से अविकसित होने का सामान्‍य कारण है। इससे घेंघा भी होता है, बच्‍चों की उत्तरजीविता कम होती है और वृद्धि और विकास क्षीण हो जाता है। गर्भवती महिलाओं में आयोडिन की कमी से मृत शिशु का पैदा होना, गर्भपात होना और अन्‍य समस्‍याएं उत्‍पन्‍न हो सकती है। आयोडिन की कमी से होने वाले विकारों से ग्रस्‍त बच्‍चे निरूत्‍साही बौने, मानसिक रूप से अविकसित होते हैं जो सामान्‍य कार्यकलाप करने, बोलने अथवा सुनने में अक्षम होते है।

एक व्‍यक्ति को अपने संपूर्ण जीवनकाल में एक चम्‍मच आयोडिन की आवश्‍यकता होती है। लेकिन, थायरोयड ग्रंथि में इतनी मात्रा एकत्र करने की क्षमता नहीं होती इसलिए समयानुसार संतुलित आहार लेते हुए नियमित रूप से थोडी थोडी मात्रा में आयोडिन भी लिया जाना चाहिए।

रोकथाम

यद्यपि आयोडिन की कमी से होने वाले विकारों को दूर नहीं किया जा सकता लेकिन इनकी रोकथाम की जा सकती है। ऐसा आयोडिनयुक्‍त खाद्य पदार्थों का उपभोग करके किया जा सकता है जैसे:

  1. आयोडिनयुक्‍त नमक
  2. समुद्री भोजन अथवा समुद्री साग (सीवीड)
  3. अंडा, मीट और दुग्‍ध उत्‍पाद
  4. अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियां (जिस मिट्टी में उन्‍हें उगाया गया है उसमें पाई गई आयोडिन की मात्रा के आधार पर)
  5. आयोडिन पूरक (सामान्‍यतया गर्भवती महिलाओं को संस्‍तुत किए जाते है)

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल