स्वास्थ्य बीमा अथवा मेडिक्लेम
आज स्वास्थ्य संबंधी उपचार काफी मंहगा है। लोग अपनी वास्तविक बीमारी से उतने दबाव में नहीं आते जितना कि चिकित्सा बिलों को देखकर आ जाते है। ऐसी चिंताओं से बचने का सबसे अच्छा उपाय है स्वास्थ्य अथवा चिकित्सा बीमा पॉलिसी लेना। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी न केवल अस्पताल में भर्ती होने के दौरान हुए व्यय को अपितु अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व के और उसके बाद के व्यय को भी कवर करती है। इसमें चिकित्स जांच पर और दवाइयां खरीदने पर व्यय हुआ धन भी शामिल हो सकता है। कवर अक्सर बीमित राशि के बराबर होता है।
आजकल स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अपने उपभोक्ताओं के लिए कई नवाचारी नीतियों और योजनाओं की पेशकश करती है। इस क्रम में नवीनतम उत्पाद 'कैशलेस हास्पीटलाइजेशन' है। इस प्लान में बीमित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने की दशा में अपने अस्पताल के बिलों का भुगतान नहीं करना होता; बीमा कंपनी सीधे ही बिलों का निपटान कर देती है। लेकिन इसमें कुछ शर्तें एवं निबंधन पूरे करने होते है। जैसे अस्पताल का बीमा कंपनी से टाइ-अप होना चाहिए और दस्तावेज सही क्रम में होने चाहिए।
बीमा को जनरल इश्योरेंस कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (जीआईसी) द्वारा देखा जाता है। इसकी चार अनुषंगी कंपनियां; नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), ओरियंटल इंश्योरंस कंपनी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) और युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को धारिता कंपनी से अलग कर दिया गया और अब इन प्रबंधन भारत सरकार के उपक्रमों के रूप में किया जाता है।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


