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परिवार स्‍वास्‍थ्‍य कल्‍याण

स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय की ओर से समाज के वंचित वर्गों को सहायता देने और उन्‍हें मातृत्‍व, प‍श्‍चात और नवजात स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या एवं परिवार नियोजन की योजनाओं के जरिए समर्थन देने हेतु अनेक योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें शामिल हैं जननी सुरक्षा योजना (278 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) , पोलियो पीडितों का पुनर्वास तथा शल्‍य क्रिया के लिए अनेक वित्तीय सहायता कार्यक्रमों के अलावा अन्‍य अनेक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याओं के लिए सहायता। पूरे देश में सरकार द्वारा प्रायोजित परिवार कल्‍याण योजनाओं के भाग के रूप में परामर्श केन्‍द्र भी उपलब्‍ध हैं।

अनेक महत्‍वपूर्ण योजनाओं की सूची निम्‍नानुसार है:

  • राष्‍ट्रीय परिवार कल्‍याण कार्यक्रम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) - भारत में 1951 के दौरान राष्‍ट्रीय परिवार कल्‍याण कार्यक्रम का लोकार्पण "राष्‍ट्रीय अर्थव्‍यवस्‍था के अनुरूप एक स्‍तर पर आबादी को स्‍थायी बनाने के लिए अनिवार्य सीमा तक जन्‍म दर को कम करने" के उद्देश्‍य से किया गया। भारत में परिवार कल्‍याण कार्यक्रम को एक प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में मान्‍यता दी गई है और इसे शत प्रतिशत केन्‍द्रीय प्रायोजित कार्यक्रम के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या नीति (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) - राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या नीति, 2000 में नागरिकों की स्‍वैच्छिक और सूचित स्‍वीकृत तथा विकल्‍प के प्रति सरकार की वचनबद्धता की पुष्टि की गई है जबकि परिवार नियोजन सेवाओं के प्रशासन में लक्ष्‍य मुक्‍त मार्ग को जारी रखा जाता है और प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या सेवाओं का लाभ उठाया जाता है।
  • राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (52 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) - राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (2005-12) में पूरे देश की ग्रामीण जनसंख्‍या को प्रभावी स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या प्रदान की जानी है, जिसमें 18 राज्‍यों पर विशेष फोकस है, जहां दुर्बल सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सूचकांक और/या दुर्बल मूलसंरचना है। इस मिशन का लक्ष्‍य स्‍वच्‍छता और सफाई, पोषण तथा सुरक्षित पेय जल के लिए स्‍वास्‍थ्‍य हेतु जिला योजना जैसे स्‍वास्‍थ्‍य के निर्धारकों के साथ स्‍वास्‍थ्‍य की चिंताओं को प्रभावी रूप से समेकित करने पर केन्द्रित किया गया है।
  • शहरी परिवार कल्‍याण योजनाएं (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) - यह योजना 1983 में कृष्‍णन समिति की सिफारिशों को अपनाने के बाद आरंभिक की गई थी। इसका मुख्‍य लक्ष्‍य झुग्‍गी झौंपड़ी वाले क्षेत्रों में स्‍वास्‍थ्‍य चौकियों की स्‍थापना के माध्‍यम से सेवा प्रदान करना है। ये सेवाएं मुख्‍यत: आरसीएच सेवाओं, निवारणात्‍मक, प्राथमिक चिकित्‍सा और संदर्भ सेवाओं सहित गर्भ निरोधक के वितरण के लिए प्रदान की जाती है।
  • नसबंदी बिस्‍तर योजना (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) - सरकार, स्‍थानीय निकायों और स्‍वयं सेवी संगठनों द्वारा चलाए जाने वाले अस्‍पतालों में नसबंदी के लिए बिस्‍तर आरक्षित करने की एक योजना 1964 में आरंभ की गई थी, ताकि उन अस्‍पतालों में नसबंदी की तत्‍काल सुविधाएं प्रदान की जा सकें, जहां इन्‍हें बिस्‍तरों के कमी आदि के कारण दाखिला नहीं मिलता था। परन्‍तु बाद में प्रसव पश्‍चात कार्यक्रम आरंभ होने के बाद ये बिस्‍तर प्रसव पश्‍चात कार्यक्रम के लिए अंतरित कर दिए गए और उसके बाद ये बिस्‍तर केवल स्‍थानीय निकायों और स्‍वयं सेवी संगठनों द्वारा चलाए गए अस्‍पतालों को स्‍वीकृत किए जाते थे।
  • प्रजनन और बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) - प्रजनन और बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम अक्‍तूबर 1997 में आरंभ किया गया जिसमें जनसंख्‍या और विकास के मुद्दों के नए मार्गों को शामिल करते हुए, इन्‍हें 1994 के दौरान काइरो में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्‍फ्रेंस इन पॉपुलेशन एण्‍ड डेवलपमेंट में सामने लाया गया। यह कार्यक्रम बाल उत्तर जीविता और सुरक्षित मातृत्‍व कार्यक्रम एवं परिवार नियोजन सेवाओं के अधीन सेवाओं/हस्‍तक्षेपों को समेकित और सुदृढ़ बनाता है और इसमें प्रजनन मार्ग/यौन संचारित संक्रमणों (आरटीआई/एसटीआई) पर नए क्षेत्रों, सेवाओं का समूह शामिल है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषय वस्‍तु प्रबंधन दल, २७-०५-२००८ को संरक्षित