पुनर्वास
- अंधे लोगों को किस प्रकार की पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है?
- नशे और शराब के व्यसनी अपनी आदत से छुटकारा कैसे पाते हैं?
- ऑर्थोपीडिक दृष्टि से नि:शक्त लोगों के लिए पुनर्वास के कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं?
- मैं धूम्रपान कैसे छोड़ूं?
- मानसिक रूप से बाधित लोगों का पुनर्वास कैसे किया जाता है?
- शाइज़ोफ्रेनिया का पुनर्वास कैसे किया जाता है?
- सुनने और बोलने में बाधा वाले लोगों का पुनर्वास कैसे किया जाता है?
- खेल चोटों के लिए पुनर्वास सेवाएं कौन-से संस्थान उपलब्ध कराते हैं?
अंधे लोगों को किस प्रकार की पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है?
अंधों तथा दृष्टि बाधित लोगों के लिए अपुनर्वास विशेषज्ञ अपनी अपंगता के लिए सामान्य जीवन जीने के लिए उनका मार्गदर्शन करते हैं। उन्हें दृष्टि पथ प्रदर्शन तकनीक, सफेद छड़ी का प्रयोग नोटों का प्रयोग सिखाया जाता है। वे दैनंदिन कार्य करना सीखते हैं यथा पकाना, बनाव, श्रृंगार करना, कपड़े पहनना और निजी स्वच्छता। दृष्टि बाधित रोगियों को बेल में कंप्यूटरों, टेलीफोनों तथा टाइपराइटरों का प्रयोग सिखाया जाता है। कुछ लोगों को देखने में मदद के लिए प्रकाशीय साधन दिए जा सकते हैं। मोमबत्ती बनाना, चाक बनाना, मोटर रीवाइंडिंग जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण। अंधों का पुनर्वास करने वाले व्यक्ति नेत्र विज्ञानियों चश्मा निर्माताओं, परामर्शदाताओं और अल्प दृष्टि व्यवसायियों के साथ काम करते हैं ताकि उन लोगों के लिए यथा काम करते हैं ताकि उन लोगों के लिए यथा संभव सर्वोत्तम उपचार सुनिश्चित हो सके जो उनकी देखभाल में हैं। दृष्टि बाधित लोगों और उनके परिवारों के लिए कुछ उपयोगी पुनर्वास संसाधन हैं:
- अंधेपन के तथ्य
- अंधेपन की योजनाएं
- अंधों के लिए राष्ट्रीय एसोसिएशन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- दृष्टि बाधित लोगों के लिए राष्ट्रीय संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- आई बैंक तथा अन्य सेवाएं (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- जिला नि:शक्तता पुनर्वास केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- दृष्टि बाधित लोगों के लिए साधन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
नशे और शराब के व्यसनी अपनी आदत से छुटकारा कैसे पाते हैं?
नशे और शराब के व्यसनियों की पुनर्वास प्रक्रिया एक आरंभिक मनोसामाजिक परीक्षा के साथ शुरू होती है। फिर निराविषीकरण की प्रक्रिया की जाती है जिसके दौरान रोगी को चिकित्सीय दृष्टि से स्थिर किया जाता है। रोगी को व्यसन की जटिलताओं तथा संबंधित मुद्दों के बारे में बताया जाता है। इस अवधि के दौरान उन्हें किसी नशीले पदार्थ का प्रयोग नहीं करने दिया जाता। फिर व्यक्तिगत चिकित्सा और सामूहिक चिकित्सा के दौर चलते हैं। पारिवारिक चिकित्सा कार्यक्रम भी हो सकते हैं जहां परामर्शदाता रोगियों के परिवार से मिलते हैं और व्यसन की समस्या पर चर्चा करते हैं। वहां से छुट्टी मिलने के बाद रोगी को आवर्तन से बचने और सतत देखभाल के लिए समय-समय पर पुनर्वास केंद्र जाना पड़ेगा। नशे या शराब के व्यसनी पुनर्वास सेवाओं के लिए निम्नलिखित केंद्रों से संपर्क कर सकते हैं:
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- स्वतंत्रता प्रतिष्ठान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- नार्कोटिक्स ऐनॉनिमस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- अल्कोहलिक्स ऐनॉनिमस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- होप ट्रस्ट इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
ऑर्थोपीडिक दृष्टि से नि:शक्त लोगों के लिए पुनर्वास के कौन-से विकल्प उपलब्ध हैं?
चलने की नि:शक्तता वाले कुछ लोग विकृति के साथ पैदा हुए थे किंतु बहुतों को किसी दुर्घटना, चोट अथवा बीमारी के कारण अपना पैर कटवाना पड़ा। जयपुर फुट एक कृत्रिम अंग है जिसका विकास 1968 में जयपुर में किया गया था। इसमें एक पैर, एक सॉकेट और एक जोड़ है। जयपुर कृत्रिम अंग दो प्रकार के हैं एक घुटने से ऊपर लगने वाला और दूसरा उन लोगों के लिए जिन्हें घुटने से नीचे काटा गया है। जिन रोगियों की टांग में पोलियो के कारण लकवा हो, उन्हें "कैलिपर" नामक एक साधन दिया जाता है। यह उन्हें आराम से चलने और सामान्य जीवन बिताने में मदद करता है।
विकलांगता वाले व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए विशेषज्ञों के एक दल द्वारा आंरभिक मूल्यांकन अपेक्षित होता है जिसमें विकलांगता सर्जन, भौतिक चिकित्सक, व्यावसायिक चिकित्सक, प्रोस्थेटिस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता और व्यावसायिक परामर्शदाता शामिल हैं। पुननिर्माण सर्जरी की जा सकती है। इसके बाद, हस्पतालों तथा आउटरीच कैम्पों के माध्यम से भौतिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। रोगियों को कृत्रिम अंग का प्रयोग करता सिखाया जाता है और काम ले सकने में मदद के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। नीचे कुछ संगठनों की सूची दी जा रही है जो कटे हुए अंग वाले को फिर से चलने में मदद करती हैं:
- डिसेबिलिटी इंडिया नेटवर्क (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- विकलांगों के लिए राष्ट्रीय संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- पुनर्वास, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- शारीरिक असमर्थता वालों के लिए संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- रीहैब इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
मैं धूम्रपान कैसे छोड़ूं?
धूम्रपान छोड़ना आसान नहीं है। कोई दो व्यक्ति एक से नहीं होते, इसलिए डॉक्टर तंबाखू के व्यसनियों के लिए अलग-अलग उपचार बताते हैं। कुछ लोग तो केवल दृढ़ संकल्प से ही छोड सकते हैं, परंतु अधिकांश लोगों को उबारने के लिए कक्षाओं, औषधियों, चिकित्सा तथा अन्य उत्पादों की ज़रूरत पड़ती है। डॉक्टरों तथा चिकित्सकों द्वारा तंबाखू पुनर्वास केंद्रों में आमतौर पर सुझाए जाने वाले कुछ उत्पाद हैं: गैर निकोटीन गोलियां, निकोटीन गम, निकोटीन इनहेलर, निकोटीन नेजल स्प्रे या निकोटीन पैच। धूम्रपान करने वालों को अपनी आदत छोड़ने में मदद करने के लिए आयुर्वैदिक औषधियों का और योग जैसे मन को विश्राम देने वाली तकनीकों का भी प्रयोग किया जाता है।
धूम्रपान छोड़ देने वाले लोग लंबा, स्वस्थ जीवन बिताते हैं। उन्हें दिल का दौरा पड़ने आघात या कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है। लोगों को तंबाखू के व्यसन से उबरने में मदद करने वाले कुछ संगठन हैं:
- निकोटीन ऐनॉनिमस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- करेज इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- कैन्सर पेशंट्स एंड इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- प्रयास (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- डॉ. दिलबाग्ज क्लिनिक (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
मानसिक रूप से बाधित लोगों का पुनर्वास कैसे किया जाता है?
मानसिक विकृतियों वाले लोगों का पुनर्वास रसायन चिकित्सा, मनश्चिकित्सा, व्यावसायिक चिकत्सा, अध्यात्मिक चिकित्सा तथा अन्य वैकल्पिक चिकित्साओं द्वारा किया जाता है। दीर्घकालीन रोगियों को उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। जो रोगी पुनर्वास प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, उन्हें परवर्ती कार्यक्रमों और नियमित जांच के लिए आना पड़ता है। मानसिक विकृतियों वाले रोगियों का उपचार करने वाले कुछ केंद्र हैं:
- निमहन्स (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- एम्स (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- मानसिक विकलांगों के लिए राष्ट्रीय संस्थान, सिकंदराबाद (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- विमहन्स (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
शाइज़ोफ्रेनिया का पुनर्वास कैसे किया जाता है?
शाइज़ोफ्रेनिया एक मानसिक विकृति है जिसमें रोगी अव्यवस्थित विचारों, बोलने की समस्याओं भ्रांतियों, विभ्रयों, और दृष्टि भ्रमों का अनुभव करता है। इस विकृति के अधिकांश रोगी 15 से 35 वर्ष के आयु वर्ग में होते हैं। शाइज़ोफ्रेनिया का उपचार सरलता से हो सकता है, विशेषत: यदि आरंभिक चरणों में पता चल जाए।
शाइज़ोफ्रेनिया के इलाज का एक अत्यंत सामान्य तरीका ऐंटीसाइकोटिक औषधियों और एटिपिकल ऐंटीसाइकोटिक औषधियों के प्रयोग द्वारा है। रोगियों का आहार के पूरक भी दिए जा सकते हैं यथा ओमेगा 3 वसा अम्ल जो तैल मत्स्य, फ्लैक्स के बीजों और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। उपचार के रूप में कभी-कभी बिजली के झटकों और साइकोसर्जरी का प्रयोग किया जा सकता है। शाइज़ोफ्रेनिया के रोगियों को ठीक करने के लिए बोधात्मक व्यवहार चिकित्सा, रीमीडिएशन चिकित्सा और बोधात्मक उन्नयन चिकित्सा का भी प्रयोग किया जाता है। रोगियों की दशा के आधार पर कभी कभी उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है। आपको उपचार मिल सकने वाले कुछ स्थान हैं:
- शाइज़ोफ्रेनिया रिसर्च फाउंडेशन (स्कार्फ) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- निमहन्स (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
सुनने और बोलने में बाधा वाले लोगों का पुनर्वास कैसे किया जाता है?
बधिरता किसी बीमारी, चोट के कारण या आनुवांशिक विरासत द्वारा हो सकती है। कुछ लोग ‘ऊंचा सुनने वाले’ की कोटि में आते हैं और अन्य पहली भाषा सीख पाने से पहले ही बधिर हो जाते हैं। बधिरता के विभिन्न स्तरों के लिए पुनर्वास की अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं। आप यहां क्लिक करके अपने सुनने के स्तर की जांच (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) कर सकते हैं।
जब आप किसी बधिर एवं मूक पुनर्वास केंद्र में प्रवेश करेंगे, तब श्रवण विज्ञानियों, वाग्भाषा रोग विज्ञानियों, विशेष शिक्षकों, मनोविज्ञानियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, ईएनटी विशेषज्ञों शिशु चिकित्सा और एक तंत्रिका विज्ञानी के एक दल द्वारा आपका परीक्षण किया जाएगा। उनके निदान के आधार पर आपको सर्जरी की सलाह दी जा सकती है या सुनने की मशीन अथवा कान का सांचा लगाया जा सकता है। जो रोगी बोलने में असमर्थ हो, उन्हें वाग् और भाषा चिकित्सा दी जाएगी जिसमें संकेत भाषा, होंठ पढ़ना सीखना और सामान्य जीवन जीने के लिए अन्य व्यवहार संशोधन सुझाव शामिल हैं। कुछ रोगियों को औषधियां दी जा सकती हैं। उसके बाद परामर्श सत्र होते हैं जिनमें रोगी और उनका परिवार शामिल होते हैं। अधिकांश पुनर्वास केंद्रों की अनुसरण और आउटरीच सेवाएं हैं ताकि रोगी की दशा की नियमित जांच की जा सकें। बधिरों को कंप्यूटर, लेखांकन, मुद्रण तथा सौंदर्य प्रसाधन में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। जिससे उन्हें स्थानीय कंपनियों में काम मिल सके। आपकी मदद कर सकने वाले कुछ संस्थान हैं:
- श्रवण बाधित लोगों के लिए अली यावर जंग राष्ट्रीय संस्थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- माता प्रकाश कौर कल्याण केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- प्रोजेक्ट डेफ इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- दक्षिण भारत में बधिर स्कूल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- डेफ रीच (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- श्रवण बाधित लोगों के लिए सहायता उपलब्ध कराने वाली कंपनियां (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- भारत में पुनर्वास एनजीओ के संपर्क नंबर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
खेल चोटों के लिए पुनर्वास सेवाएं कौन-से संस्थान उपलब्ध कराते हैं?
कठोर खेलों, में भाग लेने से रोटेटर कफ, ग्रोइन, घुटने, कंधे, कलाई, टखने या कुहनी में चोट लग सकती है। अनेक खिलाडियों को परेशान करने वाली समस्याएं है: फटे हुए लिगैमेंट, मोच, खिंचाव, फ्रेक्चर, कुहनी का टेन्डोनाइटिस, ऐचिलेस टेन्डोनाइटिस और हैमस्ट्रिंग चोटें। खेल चोटों वाले लोगों का पुनर्वास खेल भौतिक चिकित्सकों, ऑर्थोपीडिक सर्जनों, खेल औषधि चिकित्सकों और प्रशिक्षकों के एक दल द्वारा किया जाता है।
आरंभिक उपचार के एक अंग के रूप में औषधियों और सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। कुछ समय के लिए उन्हें ब्रेसिज़ पहनने या बैसाखियों तथा व्हील चेयर का प्रयोग करना पड़ सकता है। चोट के प्रकार के अनुसार, खिलाड़ी को दर्द तथा सूजन के ठीक होने तक कुछ अवधि के लिए विश्राम की सलाह दी जा सकती है। इसके बाद दृढ़ता और लचीलेपन का विशिष्ट व्यायाम होता है। योग, खेल की मालिश तथा जल चिकित्सा जैसे वैकल्पिक चिकित्साएं भी प्रयोग की जा सकती हैं। नीचे कुछ स्थान दिए जा रहे हैं जहां आपको राहत मिल सकती है:
- इंडियन एसोसिएशन ऑफ स्पोट्स मेडिसिन - दिल्ली (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- अपोलो हस्पताल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- डॉ. वेंकटचलम की शोल्डर सर्जरी इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
- नी सर्जरी इंडिया (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल

