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पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा

मानव में पक्षी एन्‍फ्लुएन्‍जा का पता कैसे चलता है?

पक्षी इन्‍फ्लुएनजा का निदान प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा करना होता है। आमतौर पर बीमारी के पहले कुछ दिनों के दौरान नाक या गले से एक फुरेरी ली जाती है। फिर, यह फुरेरी प्रयोगशाला को भेजी जाती है जहां नमूने का आणविक परीक्षण और अन्‍य प्रक्रियाएं होती हैं।

पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा के मानव स्‍वास्‍थ्‍य पर क्‍या प्रभाव होते हैं?

पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा से मानव के लिए दो प्रमुख जोखिम हैं:

  • प्रत्‍यक्ष संक्रमण पकड़ने को खतरा चदि वाइरस संक्रमित पक्षी से मानव में चला जाएं।
  • वाइरस के ऐसे रूप में उत्‍परिवर्तित हो जाने का खतरा जो मानवों के लिए अत्‍यंत संक्रामक हो।

मानवों में पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा का उपचार कैसे किया जाता है?

प्रयोगशालाओं में किए गए अध्‍ययनों से पता चला है कि मानव इन्‍फ्लुएन्‍जा वाइरसों के लिए अनुमोदित औषधियां मानवों में पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा के लिए भी प्रभावी होनी चाहिए। परंतु, यदि एन्‍फ्लुएन्‍जा वाइरस इन औषधियों के प्रतिरोधी हो जाएं तो शायद ये औषधियां काम न करें। इन औषधियों की प्रभाविता जानने के लिए और अनुसंधान की ज़रूरत है।

क्‍या मुर्गियों या अंडों को खाने अथवा तैयार करने से पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा होता है?

उन मुर्गियों तथा अंडों से पक्षी इन्‍फ्लुएन्‍जा नहीं फैलता जिन्‍हें सुरक्षापूर्वक संभाला जाए और ठीक तरह से पकाया जाए। यदि मुर्गियां या अंडे वाइरस से संक्रिमित हों, तो भी उच्‍च तापमान पर सही ढंग से पकाने पर वह मर जाएगा।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल