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शिशु रक्षा

शिशु रक्षा छोटे बच्‍चों की देखभाल करने और उन पर नज़र रखने की क्रिया है। इसमें संदेह नहीं कि सभी बच्‍चों के लिए पहले कुछ वर्ष उत्तम शिक्षा, नैतिकता, आत्‍म-अनुशासन तथा सामाजिक मेल-मिलाप का एक आधार बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण होते हैं। मातृव और बच्‍चों की देखभाल भारत में स्‍वास्‍थ्‍य रक्षा का एक अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण सिद्धांत है। इसमें बच्‍चे के आहार, संक्रमण से बचाव और बीमार बच्‍चे की देखभाल के लिए घरेलू संसाधनों का अनुकूलतम प्रयोग निहित है। ‘देखभाल की क्षमता’ का मुद्दा घर के सभी सदस्‍यों को संदर्भित करता है – पुरुष और महिलाएं, जो बच्‍चों के भावी रखवाले हैं। परंतु, व्‍यवहार में, शिशु रक्षा का मुख्‍य उत्तरदायित्‍व माता पर होता है (जो प्राय: आयअर्जक के रूप में भी मुख्‍य भूमिका निभाती है)। प्रसव के समय किस प्रकार की देखभाल की गई है, यह प्राय: शिशु तथा माता दोनों के स्‍वास्‍थ्‍य और जीवित रहने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण होती है। सरकारी स्‍तर पर परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू करने वाला भारत पहला देश है ताकि जनसंख्‍या को सीमित किया जा सके और इस प्रकार छोटे परिवार को बेहतर शिशु रक्षा उपलब्‍ध कराई जा सकें।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल