एविएन फ्लू
एविएन इल्फ्लुएन्जा को बर्ड फ्लू भी कहते हैं। यह एक संक्रमण है जो एविएन इन्फ्लुएन्जा वायरस जो कि सामान्यता पक्षियों में पाया जाता है, के कारण होता है यह वायरस संक्रमित पक्षी की अंत में पाया जाता है जो उन्हें संक्रमित नहीं करता है। लेकिन एवियन इन्फ्लुएन्जा पक्षियों में बेहद संक्रामक होता है और इससे घरेलू पक्षियों जैसे टर्की, चिकन और बत्तखों की मृत्यु भी हो सकती है।
भारत में एवियन इन्फ्लुएन्जा काफी लंबे समय से नहीं पाया गया यद्यपि यह बीमारी सदियों से चली आ रही है और पिछली शताब्दी में ही इसके चार मामले दर्ज किए गए। भारत में इसका पहला प्रकोप 2006 में हुआ। वैश्विक चुनौती को देखते हुए सरकार ने बीमारी को फैलने से रोकने के लिए एक कार्य योजना तैयार की।
रोकथाम संबंधी कदम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के अनुसार एवियन इन्फ्लुएन्जा के संक्रमण का कोई खतरा नहीं है यदि पक्षियों और अंडों को सही तरह से पकाया जाए। अध्ययन दर्शाते हैं कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो यह बताता हो कि कुक्कुट इत्यादि खाने से बीमारी हुई है। यद्यपि इसका सबसे सामान्य प्रकार संक्रमित पक्षी से सीधे संपर्क होता है लेकिन कई अन्य कारक है जिनसे संचरण हो सकता है और ये हैं कम पकाए हुए कुक्कुट उत्पाद खाना, पके हुए और अनपके उत्पादों इत्यादि को पकाना और मिलाना इत्यादि।
अत: सुरक्षित रहने के लिए वही सलाह है जो कुक्कुट से होने वाले किसी भी संक्रमण से बचने के लिए है:
- कच्चे कुक्कुट उत्पाद और अंडों को छूने से पहले और बाद मे कम से कम 20 सेकेंड तक साबुन और गर्म पानी से हाथ धोएं।
- कच्चे कुक्कुट उत्पाद से अन्य खाद्य पदार्थों को संक्रमित होने से बचाने के लिए कटिंग बोर्ड और अन्य बर्तनों को साबुन और गर्म पानी से धोएं।
- यह सुनिश्चित करने के लिए कि कुक्कुट उत्पाद को कम से कम 74 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक पकाया जाए खाद्य थर्मामीटर का उपयोग किया जाए।
- अंडे तब तक पकाए जब तक कि सफेद और पीली जर्दी सख्त न हो जाए।
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स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल


