शिक्षा के लिए सहायता
किसी भी देश में विकास के लिए शिक्षा अति महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपयुक्त सरकारी और निजी क्षेत्र की पहलों के जरिए जनसंख्या की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाए, प्रत्येक सरकार सहायता में धीरे-धीरे कटौती किए जाने से उच्च शिक्षा अधिकाधिक महंगी होती जा रही है और इसलिए इस क्षेत्र में संस्थागत निधियन की आवश्यकता होती है।
शिक्ष का दायरा भारत और विदेश दोनों में बढ़ गया है इसमें विविध क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। मानव पूँजी का विकास राष्ट्र की प्राथमिकता है और साझा उद्यम ऐसा होना चाहिए कि वित्तीय सहायता के अभाव के कारण अयोग्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रखा जाना चाहिए। शिक्षा के लिए ऋण को आर्थिक विकास और सम्पन्नता के लिए निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। आगामी वर्षों में ज्ञान और सूचना आर्थिक विकास के लिए प्रेरक बल होंगे।
योजना का लक्ष्य
शिक्षा ऋण योजना का मुख्य जोर यह है कि यद्यपि गरीब है पर प्रत्येक मेधावी छात्र को चुकाने में समर्थ होने वित्तीय सहायता प्राप्त करके शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाना है। वित्तीय सहायता के अभाव के कारण किसी योग्य छात्र को उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित न रखा जाए।
संक्षेप में योजना का लक्ष्य उचित निबंधनों के साथ वित्तीय सहायता प्रदान करना है:
- बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए निर्धन और जरूरतमंद को
- मेधावी छात्रों को उच्च/व्यावसायिक/तकनीकी
यह योजना सभी वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अपनायी जा सकती है। यह योजना बैंकों को शैक्षिक ऋण योजना का संचालन करने के लिए विस्त़त दिशानिर्देश देती हैं और क्रियान्वित करने वाले बैंकों को अधिक से अधिक इसे ग्राहक के अनुकूल बनाने के लिए छात्रों। अभिभावकों की सुविधाओं के अनुकूल परिवर्तन करने में अपनी विवेकाधीन शक्ति का उपयोग करना होगा। शिक्षा ऋण के विषय अधिक जानने के लिए शिक्षा ऋण विषय के बारे में अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)।
स्रोत: राष्ट्रीय पोर्टल विषयवस्तु प्रबंधन दल
