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ऋण

आजादी के उपरांत बैंकिंग क्षेत्र में काफी परिवर्तन आ गया है। आजादी के समय लोगों को नकदी आहरित करने के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता था। आज, हमारे पास स्‍वचालित गणक मशीनें अथवा एटीएम हैं जहां एक बटन दबाकर हम पैसे निकाल सकते हैं। कृषकों को भी बैंकिंग क्रांति से लाभ हुआ है। आज राष्‍ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं देश के दूर-दराज कोने में लगभग प्रत्‍येक गांव उपलब्‍ध हैं।

जनरल बैंक ऑफ इंडिया के नाम से ज्ञात भारत के प्रथम बैंक की स्‍थापना 1786 के पूर्वाद्ध में हुई थी। बाद में, विशेष रूप से 1900 के पूर्वाद्ध में बहुत से बैंक अस्तित्‍व में आए। आजादी के उपरांत बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने कई उपाय किए। वर्ष 1955 में स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया अथवा एसबीआई की स्‍थापना की गई। पांच वर्ष बाद, भारतीय स्‍टेट बैंक की सात सहायक बैंकों को राष्‍ट्रीयकृत किया गया। राष्‍ट्रीयकरण में 1980 में गति आई जब 14 बैंकों को राष्‍ट्रीयकृत किया गया। राष्‍ट्रीयकरण का दूसरा चरण 1980 में किया गया जब सात अन्‍य बैंको का राष्‍ट्रीय करण किया गया। इसके उपरांत, देश में लगभग 80 प्रतिशत बैंकिंग क्षेत्र सरकार के स्‍वामित्‍व के अधीन आए। बैंकों की सुरक्षा में लोगों का विश्‍वास उत्‍पन्‍न हुआ तथा जमा राशि में काफी वृद्धि हुई। इससे सरकार को कृषि सहित विभिन्‍न उद्देश्‍यों के लिए ऋण तथा साख प्रदान करने की अनुमति मिल गई।

वर्ष 1981 में सरकार ने राष्‍ट्रीय कृषि ग्रामीण विकास अधिनियम की घोषणा की जिसके फलस्‍वरूप राष्‍ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक - बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं के बारे में जानकारी हुई। यह संगठन कृषि तथा संबंधित उद्योगों को क्रेडिट के प्रवाह के लिए उत्तरदाई है।

1990 के उत्तर्रार्द्ध में सरकार ने रिजर्व बैंक इंडिया एवं नाबार्ड से परामर्श करके किसान क्रेडिट कार्ड की शुरूआत की। यह स्‍कीम कृषि उत्‍पादन, खेती तथा आकस्मिकता के लिए फसल के कृषि संबंधी व्‍यय की भरपाई करती है। इससे असीमित आवरण एवं पुनर्भुगतान की अनुमति मिल गई है। विभिन्‍न बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड स्‍कीम को अपनाने के फलस्‍वरूप कृषि क्रेडिट की उपलब्‍धता हुई है तथा कृषि उत्‍पादकता में वृद्धि हुई है। इस स्‍कीम के अतिरिक्‍त, राष्‍ट्रीयकृत बैंक बहुत से कृषि ऋण विकल्‍प प्रदान करते हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल