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कृषि तंत्र

भारत में कृषि तंत्र का निर्माण अत्‍यंत ही बहुआयामी है तथा इसमें ग्रामीण कारीगर, छोटी-छोटी इकाइयां, लघु उद्योग, राज्‍य कृषि-औद्योगिक विकास निगम तथा संगठित ट्रैक्‍टर, इंजन एवं प्रसंस्‍करण उपस्‍कर उद्योग शामिल हैं।

भारतीय मानक ब्‍यूरो (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (बीआईएस) यह सुनिश्चित करता है कि केंद्रों एवं प्रयोगशालाओं के इसके नेटवर्कों के जरिए अच्‍छी गुणवत्ता वाले कृषि एवं औद्योगिक उत्‍पादों का विनिर्माण एवं विपणन हो। भारतीय मानक ब्‍यूरो कृषि मशीनरी एवं अन्‍य उपकरणों के लिए विनिर्देश भी तैयार करता है तथा परीक्षण कूट भी नियत करता है। भारतीय मानक ब्‍यूरो के अतिरिक्‍त, सरकार ने भी गुणवत्ता वाली फार्म मशीनरी के संवर्द्धन के लिए अन्‍य फार्म तंत्र एवं परीक्षण केंद्र स्‍थापित किए है। कृषि तंत्र के मामले में, सरकारी योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्‍त कृषि मशीनरी की बिक्री तक गुणवत्ता प्रमाणन की अपेक्षा को सीमित किया जाता है। सुरक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य खतरों से जुड़े कुछ मदों पर डिजाइन अथवा कार्य के दौरान मशीनरी की स्‍थापना में न्‍यूनतम सुरक्षा मानकों को बनाना आवश्‍यक है।

प्रयोग में लाई जा रही कृषि मशीनरी पर प्रचालक की सुरक्षा अपेक्षाओं का ध्‍यान रखने के लिए खतरनाक मशीन (विनियमन) अधिनियम, 1983 (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को अधिनियम किया। अधिनियम का प्रवर्तन राज्‍य सरकारों में निहित है। कृषि मंत्रालय का कृषि एवं सहकारिता विभाग (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) इस अधिनियम के अनुश्रवण के लिए उत्तरदायी है।

यहां देश में उपलब्‍ध विभिन्‍न प्रकार के फार्म उपस्‍करों एवं मशीनरी की व्‍यापक सूची (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) है। विभिन्‍न राज्‍यों में कृषि मशीनरी के विनिर्माणकर्ताओं की जानकारी के लिए सूची I (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) और सूची II (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) का अध्‍ययन किया जा सकता है।

कृषि तंत्रीकरण पर राष्‍ट्रीय नीति

कृषि तंत्रीकरण पर अलग से कोई राष्‍ट्रीय नीति नहीं है। यह नियमित कृषि नीति (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के अंतर्गत आता है। सरकार नीचे लिखे लक्ष्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए कृषि तंत्रीकरण को बढ़ावा देती है।

  • कृषि तंत्रीकरण के फलस्‍वरूप उत्‍पाद एवं फसल उत्‍कृष्टता में स्‍थायी तौर पर वृद्धि होनी चाहिए जिसका लक्ष्‍य कृषि उत्‍पादन में वृद्धि की नियोजित दर को प्राप्‍त करना तथा इसे बनाए रखना है।
  • कृषि कार्य करने वालों की आय संतोषजनक दर पर बढ़नी चाहिए ताकि शहर एवं ग्रामीण आय के मध्‍य विषमता को नियंत्रित किया जा सके। कृषकों को एक मर्यादित जीवन यापन का उचित अवसर मिलना चाहिए।
  • कृषि तंत्रीकरण का लाभ सभी प्रकार के कृषको को मिलना चाहिए जिसमें देश के विभिन्‍न क्षेत्रों, विशेषकर वर्षा वाले क्षेत्रों में लघु एवं सीमांत कृषक शामिल है।
  • कृषि तंत्रीकरण के माध्‍यम से कठोर श्रम, उत्‍पादन कार्यों के दौरान स्‍वास्‍थ्‍य खतरे को कम करके एवं सुरक्षा में सुधार करके विशेष रूप से महिला कार्यकर्ताओं के लिए कार्यकर्ता अनुकूल वातावरण तैयार किया जाना चाहिए।
  • कृषि तंत्रीकरण के फलस्‍वरूप कृषि जिंसों के उत्‍पादन की लागत में कमी आनी चाहिए। इससे किसानों की आय में वृद्धि होनी चाहिए तथा अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में निर्यात संविदाओं के लिए प्रतिस्‍पर्धा करते समय कीमत लाभ दिया जाना चाहिए।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल