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शिक्षा, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान

नई तकनीकों के विकास के साथ कृषि प्रवृत्तियों में प्रतिदिन परिवर्तन हो रहा है। उदीयमान प्रौद्योगिकियों का अधिकतम उपयोग करने के लिए यह महत्‍वपूर्ण है कि कृषकों को अनवरत शिक्षा एवं प्रशिक्षण मिले। यह प्रशिक्षण पीटनाशम प्रबंधन, बेहतर बीजों के उपयोग, सिंचाई तथा अन्‍य के साथ-साथ उर्वरकों के इस्‍तेमाल जैसे विषयों पर दिया जाता है। सस्‍ते एवं बेहतर फार्म संव्‍यवहार के सृजन के लिए कृषि अनुसंधान एवं विकास की प्रक्रिया समान रूप से महत्‍वपूर्ण है। केंद्रीय एवं राज्‍य सरकारों ने इस क्षेत्र में बडा योगदान किया हैं।

राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय

राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली के अंतर्गत वृद्धि एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा के विकास में प्रमुख सहभागी हैं। वर्तमान में भारत में 41 राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय हैं। ये कृषि विश्‍वविद्यालय राज्‍य में कृषि से संबंधित सूचना के अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं प्रसार के लिए उत्तरदायी हैं। वे उत्‍पाद बढाने, कृषि में डिग्री एवं प्रमाणपत्र कार्यक्रम की व्‍यवस्‍था करने एवं स्‍थानीय कृषि संस्‍थाओं द्वारा आयोजित कृषक प्रशिक्षण कक्षाओं में भाग लेकर प्रौद्योगिकी के हस्‍तांतरण में सहायता प्रदान करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों का सृजन करते हैं।

राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय विभिन्‍न कृषि जलवायु जोनों की स्थिति विशिष्‍ट समस्‍याओं के निपटान के लिए अनुसंधान कार्यक्रम करते हैं। अनुसंधान कार्यक्रमों एवं कार्यकलापों की नियमित एवं अनिवर्य रूप से समीक्षा की जाती है एवं कृषि, पशुपालन, गृह विज्ञान एवं संबद्ध क्षेत्रों में उत्‍पादन में वृद्धि करना इन विश्‍वविद्यालयों का एक प्रमुख कार्य है।

कृषि दर्शन

कृषि दर्शन एवं कृषि संबंधित दूरदर्शन कार्यक्रम है जिसका प्रसारण सरकार द्वारा अपने पार्थिव टेलीविजन नेटवर्क-दूरदर्शन पर किया जाता है। यह एक आधे घंटे का कार्यक्रम होता है जो सप्‍ताह में पांच दिन 6:30 सायं प्रसारित किया जाता है। विषय-वस्‍तु मंत्रालय भारत सरकार, कृषि विस्‍तार स्‍कीम को संचार माध्‍यम समर्थन के अंतर्गत इसके सहयोग से तैयार की जाती है। कृषि दर्शन में फीचर, लघु फिल्‍म, किसानों की सफलता की कहानियां, अनुसंधान जानकारी, प्रश्‍न, फसल सेमिनार तथा कार्यक्रम में जीवंत फोन शामिल हैं। इसमें बागवानी, पशुपालन, डेयरी तथा ग्रामीण जीवन जैसे कृषि तथा संबंधित कार्यकलाप के विभिन्‍न पहलू शामिल हैं।

कृषि दर्शन, दूरदर्शन के राष्‍ट्रीय चैनल पर प्रसारित किया जाता है तथा विभिन्‍न राज्‍यों में स्थित दूरदर्शन के रिले स्‍टेशनों के माध्‍यम से स्‍थानीय भाषाओं में उपलब्‍ध है। यह कार्यक्रम दिन में निश्चित समयों पर दोहराया जाता है। आकलन सिद्ध करते हैं कि यह प्रसारण कम से कम 89 प्रतिशत जनसंख्‍या को उपलब्‍ध है। दूरदर्शन की भारी पहुंच एवं अंतर्वेधन ने इसे कृषि जानकारी के विस्‍तार का एक महत्‍वपूर्ण साधन बना दिया है। कृषि दर्शन कार्यक्रमों के ब्‍यौरे के बारे में अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल