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फसल वार, बाजार वार तथा न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य

फसल वार तथा बाजार वार मूल्‍य

सामान्‍यतया कृषि जिंसों का मूल्‍य मांग एवं आपूर्ति के बाजार कारकों द्वारा निर्धारित किया जाता है। यदि उसी जिंस को पैदा करने वाले बहुत से किसान हैं तो वे अपने उत्‍पाद के लिए कम मूल्‍य पाते हैं यदि किसी जिंस के लिए उपभोक्‍ताओं की ओर से मांग काफी है तो किसान अधिक मूल्‍य पाने की उम्‍मीद कर सकते हैं। ये मूल्‍य प्रतिदिन बदलते रहते हैं। उत्‍पाद का मूल्‍य निर्धारित करने वाले अन्‍य कारक समानता, उत्‍पाद एवं पीट रहित प्रस्थिति हैं। जलवायु दशाएं अंतरराष्‍ट्रीय मूल्‍य, उत्‍पादन की लागत एवं नए कानून कृषि जिंसों के मूल्‍य को भी प्रभावित कर सकते हैं। विभिन्‍न बाजारों में मूल्‍य भिन्‍न-भिन्‍न हो सकते हैं। सरकार ने कुछ कृषि उत्‍पादों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य निर्धारित किया हैं। किसानों के पपास अपने उत्‍पाद को निजी डीलरों को बेचने का विकल्‍प होता है, यदि वे बेहतर लाभ प्राप्‍त करने के लिए दृढ़ हों।

यहां विभिन्‍न कृषि जिंसों की फसल-वार एवं बाजार-वार (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) कीमत के‍ लिए क्लिक करें।

न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य

सरकार द्वारा न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य अथवा एम एस पी निर्धारित करने का मुख्‍य कारण किसानों के लिए लाभकारी मूल्‍य सुनिश्चित करना है ताकि उच्‍च निवेश एवं कृषि जिंसों के उत्‍पादन को प्रोत्‍साहित किया जा सकें। प्रत्‍येक वर्ष प्रमुख कृषि उत्‍पादों के लिए एम एस पी की घोषणा की जाती है जिन्‍हें कृषि लागत एवं मूल्‍य आयोग (सी ए सी पी) की सिफारिशों को ध्‍यान में रखते हुए निर्धारित किया जाता है। न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की सिफारिश करते समय सी ए सी पी अन्‍य बातों के साथ-साथ कृषि उत्‍पादन, निविष्टि के मूल्‍यों में परिवर्तन, मांग एवं आपूर्ति, बाजार मूल्‍य प्रवृत्ति तथा जीवन लागत जैसे कारकों को ध्‍यान में रखता है।

सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफ सी आई) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), भारतीय कपास निगम लि. (सी सी आई) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), भारतीय पटसन निगम लि. (जे सी आई) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), भारतीय राष्‍ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन संघ लि.(नेफेड) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) तथा तम्‍बाकू बोर्ड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) जिसके लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य निर्धारित किए जाते हैं, जैसी विभिन्‍न सार्वजनिक एवं सहकारी एजेंसियों के माध्‍यम से पी एस एस के रूप में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य आयोजित करती है। पी एस एस के अंतर्गत न आने वाले जिंसों के लिए सरकार आपस में सहमत मूल्‍य पर विशिष्‍ट यात्रा के लिए राज्‍यों से विशेष अनुरोध पर बाजार हस्‍तक्षेप की व्‍यवस्‍था करता है। क्षतियों, यदि कोई हों, का वहन केंद्र एवं राज्‍य द्वारा 50:50 आधार पर किया जाता है।

दिनांक 22.03.2007 की स्थिति के अनुसार विभिन्‍न जिंसों (767 KB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल (एम एस पी)।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल